कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के जिला प्रबंधक बजरंग कसेर पर गंभीर आरोप लगाते हुए खाद्य मंत्री, खाद्य सचिव एवं खाद्य आयोग (छत्तीसगढ़ शासन) के अध्यक्ष को शिकायत पत्र भेजा है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिला प्रबंधक द्वारा अनुबंधित निजी ठेकेदारों के नाम पर फर्जी टीसी (Transport Challan) जारी कर शासकीय वाहनों से राशन परिवहन कराया जा रहा है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
राजकुमार दुबे के अनुसार, कोरबा जिले में पीडीएस के तहत गरीबों के लिए भेजे जाने वाले खाद्यान्न के परिवहन में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती जा रही है। सरकारी गाड़ियों से राशन ढुलाई कराई जा रही है, जबकि कागजों में इसका भुगतान निजी ठेकेदारों को दिखाने की तैयारी है, जो सीधे तौर पर शासकीय धन के गबन का मामला बनता है।
शिकायत पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला प्रबंधक बजरंग कसेर द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर निजी ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। साथ ही लगभग 200 फर्जी टीसी जारी करने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
दुबे ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि परिवहन रिकॉर्ड, वाहनों की लॉग बुक, जीपीएस डेटा और सीसीटीवी फुटेज की जांच से पूरे घोटाले का खुलासा हो सकता है।
इसके अलावा, पीडीएस दुकानों में घटिया और अमानक चावल वितरण का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि गुणवत्ता निरीक्षकों की मिलीभगत से खराब चावल को भी मानक बताकर गोदामों में भेजा जा रहा है।
दुबे ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक जिला प्रबंधक को तत्काल निलंबित किया जाए तथा संबंधित परिवहन ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही, परिवहन राशि का भुगतान भी जांच पूरी होने तक रोकने की मांग की गई है।
इस मामले में जब जिला प्रबंधक बजरंग कसेर से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे आरोपों को और बल मिलता नजर आ रहा है।
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और क्या इस कथित पीडीएस घोटाले की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।


