SECL दीपका क्षेत्र में ₹140 करोड़ का ‘क्रेडिट नोट’ घोटाला: आरटीआई एक्टिविस्ट का दावा—पीएमओ और सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिकायत!
3. देश की सबसे बड़ी कोयला डकैती? कोल इंडिया से लेकर केंद्रीय सूचना आयोग तक जुड़े तार, नामजद FIR की मांग!
4. कागजों पर हेराफेरी कर निजी औद्योगिक घरानों को पहुंचाया अरबों का फायदा, SECL के पूर्व निदेशकों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप!
5. RTI में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: SECL दीपका में अचानक 10 गुना कैसे बढ़ गया रिफंड? कैग जांच की उठी मांग!
6. जब रक्षक ही बन गया भक्षक! क्या केंद्रीय सूचना आयोग ने छुपाया कोयला घोटाले का सच? मुख्य सूचना आयुक्त पर गंभीर आरोप!
7. कोयला ‘ग्रेड स्लिपेज’ महाघोटाला: ED, CBI और SFIO से दोषियों की गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की की गुहार!
8. कोरबा के आरटीआई कार्यकर्ता ने जान जोखिम में डाल खोला ‘कोयला सिंडिकेट’ का कच्चा चिट्ठा, प्रशासन में हड़कंप!
9. Zero Royalty Invoice का खेल: कैसे सरकारी खजाने को चूना लगाकर निजी कंपनियों की तिजोरियां भरी गईं, देखिए इनसाइड स्टोरी!
10. संसद और विधानसभा में गूंजेगा छत्तीसगढ़ का कोयला घोटाला? शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट की तैयारी!
*BREAKING NEWS:* छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के दीपका ओपनकास्ट खदान से देश के राजस्व को चूना लगाने वाले एक ऐतिहासिक और संगठित ‘कोयला ग्रेड स्लिपेज घोटाले’ का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू द्वारा जुटाए गए प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय, प्रधानमंत्री कार्यालय , प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई को एक आधिकारिक शिकायत सौंपी गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के मुताबिक, कोल इंडिया, एसईसीएल, सीएमपीडीआईएल और केंद्रीय सूचना आयोग के शीर्ष अधिकारियों की मिलीभगत से निजी कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए अरबों रुपये का यह खेल खेला गया है।
*खदान पर G11 ग्रेड, गंतव्य पर घटिया: यह है पूरा ‘क्रोनोलॉजी’*
दस्तावेजों के अनुसार, एसईसीएल मुख्यालय द्वारा दीपका खदान के कोयले का आधिकारिक ग्रेड *G11* घोषित कर उपभोक्ताओं से अग्रिम भुगतान लिया जाता है। लेकिन जब यही कोयला रेलवे या रोड के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचता है, तो थर्ड पार्टी सैंपलिंग एजेंसियों (CIMFR और QCI) के साथ मिलकर कागजों पर इसकी गुणवत्ता को जानबूझकर घटिया दिखा दिया जाता है।
इस कम दिखाए गए ग्रेड के अंतर का सीधा फायदा निजी औद्योगिक घरानों को मिलता है, और बाद में उन्हें ‘क्रेडिट नोट’ जारी कर अरबों रुपये सरकारी खजाने से रिफंड कर दिए जाते हैं।
*आंकड़ों की जुबानी: अचानक रिफंड में आई बाढ़*
दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक के हस्ताक्षरित आधिकारिक चार्ट से इस घोटाले के वित्तीय आकार का पता चलता है:
*वित्तीय वर्ष 2015-16:* CIMFR क्रेडिट अमाउंट केवल ₹2.98 करोड़ था।
*वित्तीय वर्ष 2016-17:* यह अचानक छलांग मारकर ₹31.94 करोड़ से अधिक हो गया।
*वित्तीय वर्ष 2018-19:* रिफंड का आंकड़ा इतिहास में पहली बार ₹1.40 अरब (₹140 करोड़) से पार निकल गया!
*वित्तीय वर्ष 2020-21:* ₹84 करोड़ से अधिक की राशि निजी कंपनियों को वापस की गई।
> *मनी लॉन्ड्रिंग का शक:* दीपका क्षेत्र के क्षेत्रीय वित्त प्रबंधक के पत्र (02.04.2024) से स्पष्ट है कि पहले यह राशि बिलासपुर मुख्यालय से समायोजित होती थी, लेकिन बाद में क्षेत्रीय स्तर से ही क्रेडिट नोट बनाकर राशि वापसी का प्रावधान कर दिया गया, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा करता है।
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*केंद्रीय सूचना आयोग भी सवालों के घेरे में*
इस घोटाले को दबाने के लिए सूचना के अधिकार का भी गला घोंटा गया। सीएमपीडीआईएल के प्रथम अपीलीय अधिकारी राजेश कुमार ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट और माइनिंग डेटा देने से इनकार कर दिया। हद तो तब हो गई जब द्वितीय अपील (CIC/CMPDI/A/2024/118146) की सुनवाई के दौरान मुख्य सूचना आयुक्त *हीरालाल सामरिया* ने संवेदनशील डेटा को सुरक्षित कराने के बजाय भ्रष्ट तंत्र को बचाते हुए अपील ही खारिज कर दी।
*इन बड़े नामों के खिलाफ दर्ज हो नामजद FIR*
शिकायतकर्ता ने देश की शीर्ष जांच एजेंसियों से निम्नलिखित अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल आपराधिक मुकदमा दर्ज कर PMLA के तहत संपत्ति कुर्क करने की मांग की है:
1. तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, कोल इंडिया लिमिटेड (कोलकाता)।
2. तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, SECL (बिलासपुर)।
3. तत्कालीन निदेशक (तकनीकी/संचालन) आर. पी. ठाकुर, SECL।
4. तत्कालीन सीएमडी व प्रथम अपीलीय अधिकारी राजेश कुमार, CMPDI (रांची)।
5. तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक/क्षेत्रीय विक्रय प्रबंधक/क्षेत्रीय वित्त प्रबंधक, SECL (दीपका)।
6. मुख्य सूचना आयुक्त (हीरालाल सामरिया) एवं उप-पंजीयक (एस. के. चिटकारा), CIC।
*क्या इस राष्ट्रीय महत्व के मामले और राजस्व चोरी पर अब सूबे के विधायक और देश के सांसद सदन में आवाज उठाएंगे? क्या ED और CBI इन सफेदपोश भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजेगी? अपडेट्स के लिए बने रहिए हमारे न्यूज पोर्टल के साथ।*



