कोरबा। ऊर्जाधानी में प्रशासन के दावों और हकीकत के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। एक तरफ जहां जिले के तमाम रेत घाट आधिकारिक रूप से बंद हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर रेत का अवैध कारोबार बिना किसी खौफ के फल-फूल रहा है। ताजा मामला शहर के मुख्य वाणिज्यिक केंद्र टीपी नगर का है, जिसने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली और रेत माफिया के साथ उनकी कथित ‘सांठगांठ’ की पोल खोलकर रख दी है।
क्या है पूरा मामला?
04 अगस्त को टीपी नगर में रंजू यादव नामक व्यक्ति का रेत से लदा एक ट्रैक्टर काफी देर तक संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ा रहा। अवैध रेत परिवहन की भनक लगते ही जब स्थानीय मीडियाकर्मियों ने मामले की सूचना संबंधित अधिकारी को दी, तो औपचारिकता निभाने के लिए मौके पर दो कर्मचारियों को भेजा गया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने प्रशासनिक इकबाल की धज्जियां उड़ाकर रख दीं। अधिकारी द्वारा भेजे गए कर्मियों की मौजूदगी में ही तस्कर रंजू यादव बेधड़क अपना ट्रैक्टर लेकर रफूचक्कर हो गया। पूरी घटना का वीडियो सामने आ चुका है, जिसमें साफ़ दिख रहा है कि तस्कर को न तो कार्रवाई का डर था और न ही मौके पर मौजूद कर्मियों का कोई खौफ।
वीडियो ने खोली मिलीभगत की पोल
घटना के वीडियो में स्पष्ट सुना और देखा जा सकता है कि प्रशासनिक कर्मचारियों के ठीक सामने से ट्रैक्टर निकाल लिया गया। सवाल उठना लाजिमी है कि जब अधिकारी के भेजे बंदे मौके पर मौजूद थे, तो गाड़ी को जब्त क्यों नहीं किया गया?
यह पूरी घटना चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि:
* खनिज विभाग का संरक्षण: बिना विभागीय शह और मिलीभगत के रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद नहीं हो सकते कि वे कर्मचारियों के सामने से अवैध रेत से लड़ी गाड़ी खींच कर ले जाएं।
* कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना: जिला कलेक्टर द्वारा अवैध उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, लेकिन धरातल पर खनिज विभाग इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है।
क्या सिर्फ कागजों तक सीमित है कार्रवाई?
और शासन के नियमों के तहत मानसून सत्र में रेत घाट पूरी तरह बंद हैं। इसके बावजूद शहर में हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर और ट्रक अवैध रेत खपा रहे हैं। जब मीडिया की सूचना पर भी अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए अमला भेजते हैं और तस्कर सरेआम माल समेटकर निकल जाता है, तो यह साबित होता है कि ‘कार्रवाई’ का नाटक सिर्फ कागजों तक सीमित है।
> बड़ा सवाल: क्या खनिज विभाग के आला अधिकारी इस खुलेआम हुई साठगांठ पर संज्ञान लेंगे? या फिर ‘साहब’ के आदेशों की बलि चढ़ाकर यूं ही रेत माफिया को शहर की तिजोरी और पर्यावरण लूटने की खुली छूट मिलती रहेगी?
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अब देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटती है या फिर इस पूरे मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।



