रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने सूखे नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 191.525 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इस कार्रवाई में अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क से जुड़े पिता-पुत्र को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने गांजा तस्करी में प्रयुक्त छह चक्का अशोक लीलैंड ट्रक, उसमें लोड हैवी मशीनरी तथा अन्य सामग्री समेत कुल करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपये का मशरूका जब्त किया है। पुलिस का कहना है कि यह कमिश्नरेट क्षेत्र में अब तक पकड़ी गई सबसे बड़ी गांजा खेप है और पूरे नेटवर्क की एंड-टू-एंड जांच जारी है। यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य जोन) तारकेश्वर पटेल के संयुक्त मार्गदर्शन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम ने की। पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि मंदिरहसौद की ओर से रायपुर आने वाले एक ट्रक में भारी मात्रा में गांजा छिपाकर ओडिशा से नागपुर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल विशेष टीम गठित कर लाभांडी स्थित अग्रसेन धाम के आगे सर्विस रोड पर नाकेबंदी कराई। कुछ देर बाद मुखबिर द्वारा बताए गए हुलिए का अशोक लीलैंड ईको मेन ट्रक (क्रमांक WB-23G-1390) वहां पहुंचा। पुलिस ने ट्रक को रोककर उसमें सवार दो लोगों से पूछताछ की। दोनों ने अपना नाम मोहम्मद लाल और मोहम्मद रूस्तम बताया तथा खुद को रिश्ते में पिता-पुत्र बताया।
प्रारंभिक तलाशी में ट्रक में भारी मशीनरी लदी होने के कारण कुछ भी संदिग्ध नजर नहीं आया। लेकिन पुलिस टीम को सूचना पर पूरा भरोसा था। इसके बाद अधिकारियों ने मशीनों को हटाकर बारीकी से जांच की। इसी दौरान मशीनों के नीचे और बीच में सावधानी से छिपाकर रखी गई सात बोरियां मिलीं। जब बोरियों को खोला गया तो उनमें अलग-अलग पैकेटों में बड़ी मात्रा में गांजा भरा हुआ था। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपी पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करते रहे, लेकिन जब्त सामग्री और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बरामद गांजे का कुल वजन 191.525 किलोग्राम पाया गया। पुलिस ने गांजा, ट्रक और उसमें लदी मशीनरी सहित कुल लगभग 1.20 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की। दोनों आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(B) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी मूल रूप से ग्राम हरिनगर, थाना राजनगर, जिला मधुबनी (बिहार) के निवासी हैं, जबकि वर्तमान में पश्चिम बंगाल के बैकरपुर जिले में रह रहे थे। मुख्य आरोपी मोहम्मद लाल पिछले लगभग 25 वर्षों से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और कोलकाता से ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र तथा अन्य राज्यों तक माल परिवहन का कार्य करता रहा है। पुलिस के अनुसार इसी परिवहन नेटवर्क का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी के लिए भी किया जा रहा था। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि गांजा ओडिशा के सुहेला क्षेत्र से लोड किया गया था और इसे नागपुर पहुंचाया जाना था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस खेप का असली मालिक कौन है, इसे किसे सप्लाई किया जाना था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।

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