कोरबा। आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायतों के बावजूद कुछ नाम विभाग में लगातार चर्चा में बने हुए हैं। पवन राजवाड़े के साथ रमाकांत दुबे, कृष्णा कुमार राजवाड़े, कुंदन चंद्र और प्रजेश शिग के नाम को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर शिकायतें सामने आने के बाद भी इन नामों को लेकर विभाग इतनी नरमी क्यों बरत रहा है? सबसे बड़ा सवाल पवन राजवाड़े की पोस्टिंग को लेकर है। अगर पहले शिकायतें हुई हैं, तो कार्रवाई या स्थानांतरण के बाद दोबारा उसी तरह की जिम्मेदारी या पोस्टिंग मिलने की वजह क्या है?वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि आबकारी विभाग में आने-जाने और पोस्टिंग को लेकर कथित तौर पर ₹10 हजार तक के लेन-देन की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि यह चर्चा गलत है तो विभाग इसकी स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता?पांच नामों को लेकर लगातार चर्चाएं होने के बीच अब लोगों की नजर आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर है। आखिर इन शिकायतों पर क्या जांच हुई? क्या किसी अधिकारी ने शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई? अगर जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा?सबसे बड़ा सवाल—पवन राजवाड़े पर आबकारी विभाग की यह कथित मेहरबानी आखिर क्यों?क्या शिकायतों के बावजूद उन्हें फिर से पोस्टिंग देने के पीछे कोई ठोस विभागीय कारण है, या फिर मामला कुछ और है?अब जरूरत है कि आबकारी विभाग पूरे मामले पर स्पष्ट और आधिकारिक जवाब दे, ताकि चर्चाओं पर विराम लग सके और यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित लोगों की स्थिति भी साफ हो सके।
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