जांजगीर। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को घोषित शुष्क दिवस यानी ड्राई डे के बावजूद जांजगीर शहर में शराब की खुलेआम बिक्री को लेकर पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार शहर के पुराने बस स्टैंड, बाजार पारा, भगत चौक, केरा रोड सहित कई इलाकों में देशी और विदेशी शराब की बिक्री सामान्य दिनों की तरह जारी रही। छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के उपलब्ध निर्देशों में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर एक दिन का शुष्क दिवस निर्धारित किया गया है। यानी इस दिन लाइसेंसी शराब दुकानों से नियमित फुटकर बिक्री बंद रहनी चाहिए।
कोतवाली के सामने ही बिक्री का दावा
सबसे गंभीर सवाल पुराने बस स्टैंड को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिटी कोतवाली के ठीक सामने स्थित पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में ही सुबह से देर शाम तक शराब की बिक्री चलती रही। यदि यह दावा सही है तो यह केवल आबकारी नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
लोगों का कहना है कि जिस दिन शराब की दुकानों को बंद रखने का नियम लागू था, उस दिन भी शराब आसानी से उपलब्ध होने की चर्चा शहर में होती रही। ऐसे में सवाल यह है कि क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या जानकारी के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई?
कई इलाकों में बिक्री की चर्चा
पुराने बस स्टैंड के अलावा बाजार पारा, भगत चौक और केरा रोड क्षेत्र में भी देशी-विदेशी शराब की बिक्री की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि ड्राई डे के दौरान शराब की कीमत सामान्य दिनों की तुलना में अधिक वसूले जाने की शिकायतें भी रहीं। इसलिए यह आवश्यक है कि पुलिस और आबकारी विभाग पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करें कि 2 अक्टूबर को जांजगीर शहर में कहीं अवैध शराब की बिक्री हुई थी या नहीं।
सवाल कार्रवाई का नहीं, निगरानी का भी
ड्राई डे का उद्देश्य ही शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करना है। ऐसे में केवल लाइसेंसी दुकानों के शटर बंद कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यदि बंदी के दिन अवैध तरीके से शराब उपलब्ध होती है तो विभागीय निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था की प्रभावशीलता पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जांजगीर-चांपा जिले में ही 2 अक्टूबर को अकलतरा पुलिस द्वारा अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की खबर सामने आई है। अकलतरा पुलिस ने 104 लीटर अवैध शराब जब्त की और कार्रवाई की। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि ड्राई डे पर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। ऐसे में जांजगीर शहर में सामने आए आरोपों की जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब की अपेक्षा
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुराने बस स्टैंड, बाजार पारा, भगत चौक और केरा रोड में वास्तव में ड्राई डे के बावजूद शराब की बिक्री हुई, तो किसके संरक्षण में यह कारोबार चलता रहा और निगरानी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे? क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं मिली? क्या आबकारी विभाग की टीम ने शहर में विशेष जांच अभियान चलाया था? यदि अभियान चलाया गया था तो इन स्थानों पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या था? इन सवालों का जवाब संबंधित पुलिस और आबकारी अधिकारियों से मिलना जरूरी है।
बहरहाल, ड्राई डे पर शराब बिक्री के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाना अब प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अवैध बिक्री में शामिल लोगों के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वहीं, यदि आरोप तथ्यहीन हैं तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट कर अफवाहों पर विराम लगाना चाहिए।


