कोरबा। शहर में लगातार सामने आ रही चोरी की घटनाएं अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गई हैं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा कर रही हैं कि चोरी का सामान आखिर कहां खपाया जाता है और उसे खरीदने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
हाल ही में मानिकपुर चौकी क्षेत्र के मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में महज 10 दिनों के भीतर एल्युमिनियम की खिड़कियों की चोरी की तीन घटनाएं सामने आईं। इनमें दो मामलों में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का सामान बरामद किया है। लेकिन तीसरी वारदात को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि चोरी की घटनाओं में बालिग ही नहीं, नाबालिग बच्चे भी शामिल पाए जाते हैं। कुछ बच्चे मामूली लालच या चंद पैसों के लिए चोरी जैसे अपराध की राह पर चले जाते हैं। नतीजा यह होता है कि उनका भविष्य दांव पर लग जाता है, परिवार की बदनामी होती है और कई बार उन्हें कानून की कार्रवाई और जेल तक का सामना करना पड़ता है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल और है—इन बच्चों को चोरी का सामान बेचने के लिए तैयार कौन करता है?
अगर चोरी करने वाला पकड़ा जा रहा है, तो चोरी का माल खरीदने वाले ठिकानों और उसे आगे खपाने वाले लोगों की जांच भी उतनी ही गंभीरता से क्यों नहीं होनी चाहिए?
प्रशासन और पुलिस से विनम्र अपील है कि इस पूरे मामले को सिर्फ चोर पकड़ने तक सीमित न रखा जाए। कबाड़ कारोबार की आड़ में चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त हो रही है या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष और प्रभावी जांच हो। यदि कोई व्यक्ति बच्चों को चोरी के लिए प्रेरित कर रहा है या चोरी का माल खरीदकर उन्हें अपराध की दुनिया में धकेल रहा है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है।
क्योंकि सवाल सिर्फ आज की चोरी का नहीं है… सवाल कोरबा के उन बच्चों के भविष्य का है, जो चंद रुपयों के लालच में अपना पूरा जीवन बर्बाद करने की राह पर पहुंच रहे हैं।
“चोरों पर कार्रवाई की खबर तो आती है साहब, अब जरा उन ठिकानों की भी खबर लीजिए, जहां चोरी का माल पहुंचकर ‘कबाड़’ बन जाता है!”
👉 प्रशासन से सवाल नहीं, अब जवाब और ठोस कार्रवाई की उम्मीद है।
👉 बच्चों को अपराध से बचाइए और चोरी का माल खरीदने वालों तक भी जांच की पहुंचाइए।
👉 अगर कबाड़ कारोबार में कोई अवैध गतिविधि है, तो उसे संरक्षण नहीं—कानून की कार्रवाई चाहिए।






















