पाली। कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत स्थित धान उपार्जन केंद्र नुनैरा में धान खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान खराब गुणवत्ता पाए जाने पर जिन धानों को वापरा किया जाता था. उन्हें उपार्जन केंद्र के कर्मचारियों एवं प्रबंधक की कथित मिलीभगत से गांव में एक निक्षित स्थान पर रखवाया जाता था।
सूत्रों का दावा है कि उका धान को बाद में उका किसान से सांठ गांठ कर रात के समय अदला-बदली कर पुनः उपार्जन केंद्र में लाया जाता था। इस प्रक्रिया से शासन को ताखों रुपये की आर्थिक क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। વીતી રાત્રિ સૂત્રો ચે સૂચના નિતને પર નિગરાની શચિતિ છે ચંદ્રસા સુમ્પાત બદીર પૂર્વ શ્રામ છે છ મરિત્ર હપીને જેદ્ર पहुंचे। मौके पर राजवीर डीजे लिखा हुआ सफेद रंग का एक पिकअप वाहन पाया गया जो प्लास्टिक की बोरी में भरा हुआ धान से पूरा भरा हुआ था जिसका चालक गांव का निवासी अमोल दास बताया जा रहा है जो की मंडी में हमाल का कार्य भी करता है।
प्रताक्षदर्शियों के अनुसार वाहन से थान की बोरियां उतारी जा रही थी। पूछताछ के दौरान हमालों एवं कर्मचारियों द्वारा स्पष्ट एवं संतोषजनक जवाब नहीं दिए गए।
‘हमालों के पारिश्रमिक में कटौती का भी आरोप
छत्तीसगढ़ कृषि मंडी विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मंडी में कार्यस्त हमातों को धान खात्ती करने, स्टैकिंग, छत्ती लगाने, सिलाई सहित समस्त कार्यों के लिए 234,77 प्रति किंटल की दर से भुगतान किया जाना निर्धारित है। हालांकि, आरोप है कि उपार्जन केंद्र में हमालों से मात्र 16 से 17 प्रति किटत की दर पर कार्य कराया जा रहा है, जबकि शेष राशि अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा आपस में बांट ली जाती है।
इस स्थिति के वलते हमालों द्वारा बाहरी आग के साधन अपनाने तथा किसानों से अवैध लेन-देन की शिकायतें भी सामने आ रही है।
फिलहाल, इरा पूरे गागले में संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सागने नहीं आई है। ग्रामीणों एवं निगरानी समिति ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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