सड़क है गड्ढे में या गड्ढे में सड़क? यह सवाल आज कोरबा जिले की बदहाल सड़कों को देखकर हर आम नागरिक की जुबान पर है। बारिश शुरू होते ही जिले के कई इलाकों की सड़कों की हालत ऐसी हो गई है कि सड़क और गड्ढे में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
कहीं सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है, तो कहीं बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर गया है। हालात यह हैं कि वाहन चालकों को सड़क पर चलने के बजाय गड्ढों के बीच रास्ता तलाशना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालक सबसे ज्यादा परेशान हैं और हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
🌧️ बारिश आते ही सामने आ गया सड़क निर्माण की गुणवत्ता का सच?
कोरबा जिले के कई क्षेत्रों में जगह-जगह जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सड़क किनारे न तो पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई दे रही है और न ही गड्ढों की समय पर मरम्मत। सवाल यह है कि जब हर साल बारिश आती है, तो फिर जलभराव और सड़क की बदहाली से निपटने की तैयारी पहले से क्यों नहीं की जाती?
आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन बारिश के कुछ ही दिनों में सड़क की तस्वीर बदल जाती है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और मरम्मत कार्यों की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
👉 कोरबा की जनता पूछ रही है—आखिर इन जर्जर सड़कों की जिम्मेदारी किसकी है?
👉 सड़क की मरम्मत कब होगी?
👉 जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
👉 क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखेंगे?
कोरबा में विकास के दावों के बीच सड़कों की यह तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार विभाग इन गड्ढों को भरता
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