बालको भदरापारा स्थित सीएसईबी राखड़ डैम के बजाय डिंगापुर क्षेत्र के ईंट भट्ठों में पहुंचा जा रहे हैं कोल रिजेक्ट
CSEB प्लांट से निकलने वाले कोल रिजेक्ट के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस कोल रिजेक्ट को पर्यावरणीय नियमों के तहत राखड़ डैम में डंप किया जाना चाहिए, वह बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठा संचालकों तक पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कोल रिजेक्ट से लदे वाहन डैम का रास्ता छोड़ सीधे ईंट भट्ठों की ओर जाते देखे जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही है, तो यह केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और राजस्व हानि का भी गंभीर मामला हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोल रिजेक्ट का निस्तारण डैम में होना तय है, तो वह निजी ईंट भट्ठों तक कैसे पहुंच रहा है? क्या यह सब संबंधित अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है, या फिर उनकी कथित मिलीभगत से पूरा खेल संचालित किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि संबंधित विभाग को वाहनों की GPS ट्रैकिंग, गेट पास, डिस्पैच रजिस्टर और ईंट भट्ठों तक पहुंचे कोल रिजेक्ट की जांच करानी चाहिए। यदि अनियमितता सामने आती है, तो दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनता का सवाल:
क्या डैम के नाम पर कोल रिजेक्ट का काला खेल चल रहा है? आखिर इस पूरे नेटवर्क का जिम्मेदार कौन है?
CSB प्लांट से निकलने वाले कोल रिजेक्ट के निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जिस कोल रिजेक्ट को पर्यावरणीय नियमों के तहत राखड़ डैम में डंप किया जाना चाहिए, वह बड़े पैमाने पर ईंट भट्ठा संचालकों तक पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कोल रिजेक्ट से लदे वाहन डैम का रास्ता छोड़ सीधे ईंट भट्ठों की ओर जाते देखे जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही है, तो यह केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और राजस्व हानि का भी गंभीर मामला हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोल रिजेक्ट का निस्तारण डैम में होना तय है, तो वह निजी ईंट भट्ठों तक कैसे पहुंच रहा है? क्या यह सब संबंधित अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है, या फिर उनकी कथित मिलीभगत से पूरा खेल संचालित किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि संबंधित विभाग को वाहनों की GPS ट्रैकिंग, गेट पास, डिस्पैच रजिस्टर और ईंट भट्ठों तक पहुंचे कोल रिजेक्ट की जांच करानी चाहिए। यदि अनियमितता सामने आती है, तो दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनता का सवाल:
क्या डैम के नाम पर कोल रिजेक्ट का काला खेल चल रहा है? आखिर इस पूरे नेटवर्क का जिम्मेदार कौन है?






