कोरबा। जिले में स्थित कोरबा मेडिकल कॉलेज, जो 100 बेड के नाम से जाना जाता है, उसके बाहर की स्थिति बदहाल हो चुकी है। सीपेज से निकले गंदे पानी के कारण सड़क पर जल भराव की समस्या आम हो गई है। हजारों की संख्या में रोज़ाना यहां से गुजरने वाले मरीज, परिजन, आम नागरिक और वाहन चालक इस दुर्गंध भरे पानी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते महीनों बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
कोरबा जिले से प्रदीप राव कि रिपोर्ट
🚧 मेडिकल कॉलेज के बाहर गंदे पानी का तालाब
कॉलेज के प्रवेश मार्ग पर लंबे समय से पाइपलाइन लीकेज और सीपेज की वजह से गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है। बारिश के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। सड़क पर पानी भरने से पैदल चलने वाले और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन वाहन फिसलने की घटनाएं होती हैं।
पहले भी मिला था आश्वासन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं
कुछ महीने पहले जब मीडिया टीम ने कॉलेज प्रबंधन से इस मुद्दे पर बात की थी, तब गोपाल कंवर (मेडिकल कॉलेज सुप्रिटेंडेंट) ने बताया था कि समस्या को नगर पालिक निगम कोरबा को अवगत कराया गया है और निगम ने जल्द समाधान का आश्वासन भी दिया था। लेकिन महीनों गुजर जाने के बाद भी न तो पाइपलाइन की मरम्मत हुई और न ही जल निकासी की कोई व्यवस्था की गई।
स्थानीय होटल संचालकों और ऑटो चालकों का रोष
जब मीडिया टीम ने दोबारा मौके पर होटल संचालकों और ऑटो चालकों से बातचीत की तो लोगों ने साफ कहा कि यह समस्या नई नहीं है। “कई बार अधिकारी आते हैं, फ़ोटो खींचकर चले जाते हैं। लेकिन काम कोई नहीं होता। लगता है सरकार और विभाग दोनों ने आंखें बंद कर ली हैं,” एक होटल संचालक ने गुस्से में कहा।
एक ऑटो चालक ने तंज कसते हुए कहा — “मंत्री और अधिकारी तो अपनी बड़ी गाड़ियों में आते-जाते हैं। कभी पैदल चलकर देखें तो पता चले कि आम जनता किस हाल में इस सड़क से गुजरती है।”
🏛 सरकारी उदासीनता पर उठ रहे सवाल
जनता का कहना है कि स्वास्थ्य संस्थान के बाहर इस तरह की स्थिति शर्मनाक है। गंदा पानी न सिर्फ आवागमन में दिक्कत पैदा कर रहा है, बल्कि बीमारियों को भी दावत दे रहा है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर जनता की इस गंभीर समस्या पर संबंधित विभाग कार्रवाई कब करेगा?
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कोरबा मेडिकल कॉलेज के बाहर सड़क पर जलभराव की समस्या प्रशासनिक उपेक्षा का सीधा उदाहरण है। आम जनता उम्मीद कर रही है कि जिम्मेदार विभाग जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाए ताकि आने-जाने में होने वाली परेशानी से राहत मिल सके



