जिला जांजगीर चांपा
पुरुषोत्तम साहू की रिपोर्ट
टोकन नहीं काटने से किसने की परेशानी बढ़ गई है जिसमें किसानों को आर्थिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है किसानों ने बताया कि ऑनलाइन मोबाइल एप डाउनलोड करने के बाद भी टोकन नहीं काटने से लगभग सभी किसान परेशान हो चुके हैं जो अपने मेहनत की गाड़ी कमाई समर्थ मूल्य पर धन उपार्जन केंद्र में धान बेचने के लिए पहुंच रहे हैं लेकिन उन्हें अति समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जिस पर किसानों ने पूर्व की भांति टोकन काटने की नीति को जारी रखने की मांग की है
वही कई उपार्जन केंद्रों में टोकन नहीं काटने से विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है जिस पर उपार्जन केंद्र के प्रभारी ने बताया कि टोकन नहीं काटने से नाराज किसानों ने हम पर ही आरोप मड़ते हैं कि आप टोकन नहीं काट रहे हैं यदि शासन टोकन की लिमिट को बढ़ा दे तो किसान भी खुशी-खुशी अपने धन की बिक्री कर सकेंगे और हम भी एक सुरक्षित और स्वतंत्र माहौल में धान खरीदी कर सकते हैं
तो वही कई किसानों ने तो यह भी कहा कि उपार्जन केंद्र में धान बेचने में हो रही समस्याओं की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इससे तो अच्छा हम बाहर में ही बेच वही अच्छा है जिस पर हमें तुरंत पैसे भी मिल जाते हैं और अपने हमारी ज़रूरतें भी पूरी हो जाती है
सरकार की इस नीति को किसानों ने तानाशाह नीति बताते हुए कहा कि यदि हम दुकान में धान बेचने जाते हैं तो वहां खाद्य अधिकारी या शासकीय अधिकारी उस जगह पर जाकर उसे दुकान से धान जपती कर लेते हैं तो क्या हम अपनी मेहनत की उपजाई हुए धान को अपने हिसाब से भी नहीं भेज सकते जहां कह दिया जाता है कि अवैध धान है
तो हम किसान क्या करें
तो शासन को चाहिए कि इन किसानों की पीड़ा को समझें और इनका लिमिट को बढ़ा दिया जाए जिससे हो रही समस्या से छुटकारा मिल सके और अपनी मेहनत की उपजाई हुई धान को बेहतर ढंग से अपने जरूरत के हिसाब से बेच सकें


