चुनाव हुवे एक वर्ष से अधिक समय से ज्यादा समय गुजर रहा है आज ग्राम पंचायतों के नव निर्वाचित सरपंच अब पकौड़ा चाय बेचने मजबूर हैं शायद केंद्र सरकार एक बात सही कही है नौकरी तो नहीं मिलेगी अब पकौड़ा चाय बेचो इधर राज्य सरकार बखान करते थक नहीं रहे हैं हमने स्कूल बनाए सड़के बनाए नल जल योजना के तहत घर घर तक पानी पहुंचाएं गली गली कंक्रीट रोड़ बनाए कभी ग्रामीण क्षेत्रों में जा कर देख लो राज्य के चौकी दार बच्चे आज भी जर्जर स्कूल में पढ़ने मजबूर हैं आम जनता आज भी नदी ढोढी कुंवा का पानी पीने आज भी मजबूर हैं सड़के से वंचित हैं सड़के भी बनी हैं तो चार से छह महीने में उखड़ कर ऐसी हालत हो गई है
खाली पैर चलो तो छाले पड़ जाएंगे आज आम जनता गुजरे हुवे वही पुराने रास्ते याद कर रहे हैं वहीं तालाब नदी कुंवे याद कर रहे हैं आज भी आज आज राज्य सरकार कहती हैं की हमने हर घर तक पानी पहुंचाने की काम किए हैं लेकिन आज भी अनेकों ग्राम पंचायत में टंकी तो बनी मगर पानी की सफलाई नहीं है स्कूल तो है मगर अंदर बैठ कर पढ़ने योग्य नहीं आज इस तरह की खस्ता हालत से लोग गुजर रहे हैं आज अगर राज्य सरकार सोचती की आज ग्राम पंचायतों के सरकार सरपंच भी तो है जिस तरह केंद्र सरकार राज्य सरकार पंचायत के सरकार पांच साल की ही तो हैं तो क्यू पंचायत सरकार को सीधा राशि नहीं दिया जाता है ता कि पंचायत के विकास को मजबूती और अच्छे गुणवत्ता से बना सके आज आने वाले पंचायतों की राशि में कमीशन खोरी बन्दर बांट ठेकेदार की कमीसन घटिया निर्माण टोटल सरकार की काम घटिया जो चार महीनों में उखड़ कर स्वाह अब तो ग्राम पंचायत के सरपंच सोच में पड़ गए हैं की सरपंची के बजाय खेती किसानी या फिर मोदी सरकार की योजना के तहत काम करे पकौड़ा चाय बेचने का







