कोरबा। “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत पुलिस की रेड ने एक बार फिर शहर की रातों की सच्चाई उजागर कर दी। ONC (One Night Club) और सेंट्रल प्वाइंट बार में नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ती मिलीं, जैसे कानून सिर्फ बोर्ड पर लिखा एक सुझाव हो, पालन करने की चीज़ नहीं। देर रात तक जाम छलक रहे थे, और जिम्मेदार लोग मानो “टाइमिंग” को भी पार्टी का हिस्सा समझ बैठे थे।
हैरानी की बात यह नहीं कि नियम टूटे… हैरानी इस बात की है कि इतने समय से सब कुछ “खुल्लम-खुल्ला” चलता रहा और सबको पता भी था। जब एक युवक शराब के नशे में स्कॉर्पियो को सीढ़ियों पर चढ़ाने निकला, तब जाकर सिस्टम की नींद खुली। अब पुलिस की सख्ती के बाद बार मैनेजरों पर कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन सवाल वही है—क्या ये कार्रवाई स्थायी सुधार लाएगी या फिर कुछ दिनों बाद वही “पुराना नाइट शो” फिर चालू हो जाएगा?
कोरबा में कानून का हाल कुछ ऐसा है कि दिन में नियम सख्त दिखते हैं और रात होते ही सब ‘रिलैक्स मोड’ में चले जाते हैं। फिलहाल पुलिस की इस रेड ने यह जरूर जता दिया है कि अब “पार्टी” बिना परमिशन और टाइमिंग के नहीं चलेगी… वरना अगली सुबह खबर नहीं, केस बनेगा।


