कोरबा। कोरबा जिले में अमानक चावल भण्डारण किए जाने के कारण जांच पड़ताल के दौरान बड़े पैमाने पर लॉट रोक दिए जाने के बाद सरकारी उचित मूल्य की दुकानों में राशन के भंडारण में विलंब, परिवहन की अस्त-व्यस्त व्यवस्था के कारण जो राशन वितरण की चाल एक बार बिगड़ी है कि वह पटरी पर सही ढंग से लौटने का नाम नहीं ले रही। इसका खामियाजा न सिर्फ उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है बल्कि उचित मूल्य दुकानों के संचालक भी काफी हैरान व परेशान हैं। सुबह से लेकर शाम तक उन्हें कभी फोन पर तो कभी प्रत्यक्ष तौर से उपभोक्ताओं की खरी-खोटी सुननी पड़ रही है। पीडीएस संचालकों को जहां पिछले 7 महीने से उनकी कमीशन राशि नान अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के कारण आज तक अप्राप्त है तो दूसरी तरफ कुछ राइस मिलरों और भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से पीडीएस की सुचारू व्यवस्था बहुत गड़बड़ हो चुकी है। ऐसे में तकनीकी मशीनरी अपडेट का काम होने से 5 दिन के लिए राशन का वितरण और प्रभावित हो गया है। 25 मार्च तक अपग्रेडेशन के बाद 26 मार्च से 31 मार्च तक सरकारी राशन का वितरण किए जाने की संभावना बनी है। लेकिन, इस पर भी संकट के बदले गहरा रहे हैं।
👉🏻 फरवरी का पूरा चावल मिला नहीं,तो मार्च में कैसे बाँटें..?
उचित मूल्य दुकानों के संचालकों से चर्चा करने पर ज्ञात हुआ कि शहर क्षेत्र के दुकानों में फरवरी और मार्च माह का राशन वितरण करने के निर्देश तो दे दिए गए हैं किंतु उतनी मात्रा में चावल है ही नहीं। फरवरी माह में एक बार आबंटन जारी किया गया और इसके बाद गड़बड़ व्यवस्थाओं के बीच मार्च माह शुरू हो गया। मार्च माह का चावल भंडारण कर दिया गया और फरवरी व मार्च माह के राशन वितरण की व्यवस्था के बीच फरवरी का आवंटन दोबारा दुकानदारों को प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में अनेक दुकानों में फरवरी माह के कोटे का राशन नहीं है तो वह मार्च माह में दोनों माह का राशन कैसे बाटेंगे? उपभोक्ता हैं कि वह आश्वासन पर टिके हुए हैं। उन्हें पीडीएस संचालकों ने अधिकारियों के निर्देश के आधार पर कह दिया कि फरवरी और मार्च का राशन एक साथ मिल जाएगा चिंता ना करें। किंतु अधिकारियों की सुस्त चाल और नान की लापरवाही की वजह से गोदाम में जब चावल ही नहीं होगा तो वितरण क्या किया जाएगा? मार्च माह खत्म होते ही अप्रैल महीने में अप्रैल, मई और जून 3 माह का चावल एक साथ वितरण करने की व्यवस्था करनी होगी। कुल मिलाकर उपभोक्ताओं को जहां बार-बार पीडीएस का चक्कर लगाना पड़ रहा है और दुकानों में भीड़ बढ़ने की पूरी संभावना है।
दूसरी तरफ उचित मूल्य दुकानों के संचालक भी गड़बड़ व्यवस्थाओं के कारण आए दिन लोगों के गुस्से, उनके उलाहना और अधिकारियों के दबाव के बीच काम करने के लिए मजबूर हैं। पीडीएस संचालकों ने बताया कि अधिकारी उनकी कोई बात सुनने के लिए तैयार नहीं होते, बस निर्देश दे दिया जाता है कि आपको विरतण करना है किंतु वितरण के लिए उनके पास पर्याप्त मात्रा में चावल का आवंटन ही नहीं है तो भला वे क्या बाँटें…?
दूसरी तरफ नान से लेकर खाद्य विभाग के अधिकारी यह दावा करते रही थक रहे कि भंडारण की व्यवस्था पर्याप्त रूप से कर दी गई है, कहीं किसी तरह की कोई समस्या नहीं है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही रहती है।
जब शहर में यह हाल है तो आखिर ग्रामीण और दूरस्थ अंचल में क्या स्थिति होगी?
हालांकि इस समय पीडीएस दुकानों में राशन भंडारण की व्यवस्था के लिए और भी ट्रांसपोर्टर लगा दिए गए हैं ताकि समय पर भंडारण सुनिश्चित किया जा सके। किंतु, फरवरी और मार्च माह का राशन एक साथ मिलने को लेकर जो व्यवस्था वर्तमान में है, उसे दुरुस्त करने के विषय में अधिकारी नहीं सोच रहे।




