कोरबा-हरदीबाजार। आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित उतरदा (हरदी बाजार, तह. पाली) में धान खरीदी के दौरान वित्तीय अनियमितता और गबन की शिकायत की जांच में 8,82,685.70 रुपये की वित्तीय अनियमितता की पुष्टि हुई है। मूल शिकायत में करीब 25 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप अरुण कुमार राठौर द्वारा लगाया गया था। जांच में तत्कालीन समिति प्रबंधक तुलाराम यादव, पर्यवेक्षक जमाल खान और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की हरदीबाजार शाखा के प्रबंधक अजय साहू की भूमिका प्रथमदृष्टया संदिग्ध एवं उत्तरदायित्वपूर्ण पाई गई है
जांच में सामने आए तथ्य
जांच दल में शामिल संतोष कुमार कंवर, व.स.नि. (दल प्रभारी) 2. श्रीमती सुभद्रा सिदार, स.नि. (दल सहायक) 3. भूपेन्द्र कुमार साहू, स.नि. (दल सहायक) द्वारा की गई जांच में सामने आया कि समिति के खाते से तत्कालीन प्रबंधक तुलाराम यादव के व्यक्तिगत खाते में 3,79,511 रुपये स्थानांतरित किए गए। राशि किस मद में खर्च की जानी थी, इसका स्पष्ट उल्लेख कार्यवाही पंजी में नहीं मिला। इस मामले में तत्कालीन प्रबंधक, पर्यवेक्षक और बैंक शाखा प्रबंधक को जिम्मेदार माना गया है।
धान खरीदी से जुड़े हमाली, तौलाई, बारदाना रिपेयरिंग, स्टैकिंग, स्टेंसिल और चौकीदार आदि मदों में 27 मार्च 2026 को 26,12,688 रुपये का भुगतान दर्शाया गया। जांच में शासन के निर्धारित मानकों की तुलना में 3,74,374.70 रुपये अधिक व्यय पाया गया। इस राशि को समिति को हुई आर्थिक क्षति मानते हुए वसूली योग्य बताया गया है।
समिति के अनिवार्य अमानत खाते से भी नियम विरुद्ध 1,20,000 रुपये की निकासी सामने आई। जांच में राशि खर्च करने की स्वीकृति, आदेश और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र पर्याप्त रूप से नहीं मिले। स्थल निरीक्षण में कुछ कार्यों के अस्तित्व पर भी सवाल पाए गए। वैकल्पिक कर्मचारी से लिए गए कोरे चेक के उपयोग में भी अनियमितता पाई गई।
किसानों से ली गई हिस्सा अमानत राशि को निर्धारित समय पर समिति के खाते में जमा नहीं करने का मामला भी जांच में सामने आया। बोईदा के दो किसानों की 5,000 रुपये की हिस्सा राशि तथा अभिलेखों में कुल 3,800 रुपये की विसंगति पाई गई, जिसे वसूली योग्य बताया गया है।
जांच में वित्तीय मामलों में सक्षम अनुमोदन के बिना राशि आहरण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने की बात भी सामने आई। जांच दल ने इसे गंभीर प्रक्रियात्मक एवं प्रशासनिक लापरवाही माना है।
कार्रवाई के लिए लिखे गए पत्र
जांच पूरी होने के बाद उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक, कोरबा ने 10 जुलाई 2026 को कलेक्टर को पत्र भेजकर दोषियों से वसूली और कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी। बैंक कैडर के कर्मचारियों की भूमिका सामने आने के कारण जांच प्रतिवेदन संयुक्त आयुक्त सहकारिता, बिलासपुर को भेजा गया।
इसके बाद 16 जुलाई 2026 को संयुक्त आयुक्त सहकारिता एवं संयुक्त पंजीयक, बिलासपुर ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को पत्र जारी कर तुलाराम यादव, जमाल खान और अजय साहू के विरुद्ध सेवा नियमानुसार कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
जांच प्रतिवेदन में छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1960 की धारा 58(बी) के तहत विशेष अंकेक्षण कराने, धान खरीदी वर्ष 2025-26 में वास्तविक आर्थिक नुकसान का आकलन करने, जिम्मेदारी तय करने और संबंधित राशि की वसूली की अनुशंसा की गई है।
मूल शिकायत में करीब 25 लाख रुपये की गड़बड़ी का आरोप था,
जबकि वर्तमान जांच में 8,82,685.70 रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। शेष आरोपों और वास्तविक आर्थिक नुकसान की स्थिति विशेष अंकेक्षण के बाद और स्पष्ट होने की संभावना है।





















