कोरबा। जिले में पीडीएस घोटाले का एक गंभीर मामला सामने आया है। कुछ लोगों द्वारा सिंडिकेट बनाकर शासकीय खाद्यान्न की अफरा-तफरी और कालाबाजारी करने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत कोरबा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपी है।
शिकायत में बताया गया है कि कई वर्षों से जिले में खाद्य विभाग की मिलीभगत से शासकीय चावल की चोरी और कालाबाजारी का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। आरोप है कि जब भी ऐसे मामले सामने आते हैं तो भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारी खुद जांच करते हैं और मोटी रकम लेकर दोषियों को बचा लेते हैं।
शिकायत में दावा किया गया है कि जिले की पीडीएस दुकानों से करीब 37 लाख किलोग्राम से अधिक खाद्यान्न गायब पाया गया, जिसकी कीमत लगभग 15 करोड़ रुपये है। हाल ही में 23 सितंबर को गेवरा बस्ती से कटघोरा ले जाई जा रही चावल से भरी गाड़ी (CG 12 BM 3490) को मीडिया की सूचना पर पकड़ा गया। वाहन में 135 बोरी शासकीय चावल लोड था, जिसे कथित रूप से मित्तल राइस मिल खपाने की योजना थी। ड्राइवर के भाग जाने के बाद गाड़ी को पुलिस ने कटघोरा थाने पहुंचाया, लेकिन आरोप है कि खाद्य विभाग के अधिकारी संदिग्धों को बचाने की कोशिश कर रहे थे।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस पूरे मामले की FIR कटघोरा थाने में दर्ज की जाए और जांच किसी अन्य जिले के अधिकारियों से कराई जाए, क्योंकि कोरबा के खाद्य अधिकारी स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि इस घटना से जुड़े ऑडियो और वीडियो सबूत भी मौजूद हैं।
शिकायतकर्ता ने प्रशासन से अपनी सुरक्षा की भी मांग की है। उनका आरोप है कि भ्रष्टाचार उजागर करने पर उन्हें खाद्य विभाग और राइस मिल संचालकों से लगातार धमकियां मिल रही हैं।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में किस तरह की कार्रवाई करता है और करोड़ों के खाद्यान्न घोटाले में शामिल जिम्मेदार कब तक बेनकाब होते हैं।






