बाराद्वार पुलिस की सुस्ती या रसूखदारों का दबाव ? 60 दिन बाद भी अनाचार का आरोपी भूपेश साहू फरार,पीड़िता दहशत में l
शादी का झांसा देकर युवती से अनाचार का मामला,FIR के 60 दिन बाद भी बाराद्वार पुलिस के हाथ खाली, सरपंच और आरोपी पक्ष पर धमकाने का आरोप l
छत्तीसगढ़ / बाराद्वार सक्ति महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों के बीच सक्ति जिले के बाराद्वार थाना क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। यहाँ एक युवती को प्रेम जाल में फंसाकर, शादी का झांसा देकर लगातार शारीरिक शोषण (अनाचार) करने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज हुए लगभग दो महीने 60 दिन का समय बीत चुका है, लेकिन बाराद्वार पुलिस अब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। पुलिस की इस कछुआ चाल और ढीली कार्रवाई को लेकर अब कई तरह के गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
प्रेम जाल में फंसाकर किया अनाचार, शादी के नाम पर की पैसों की उगाही?
शिकायत के मुताबिक आरोपी भूपेश साहू निवासी किरारी ने पीड़िता को अपने प्रेम जाल में फंसाया था। आरोपी ने युवती को जीवन भर साथ निभाने और शादी करने का पवित्र झांसा दिया, जिसके चलते पीड़िता उसके झांसे में आ गई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी ने उसकी मर्जी के खिलाफ लगातार उसका शारीरिक शोषण किया।
इतना ही नहीं आरोपी ने पीड़िता को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करते हुए पैसों का दबाव भी बनाया। आरोपी द्वारा कहा गया यदि तुम रुपये इकट्ठा करोगी तभी शादी संभव है, मैं भी पैसे जोड़ रहा हूँ। आरोपी की बातों में आकर पीड़िता दिन-रात मजदूरी करती रही और मेहनत की गाढ़ी कमाई एक-एक पाई जोड़कर आरोपी के हाथों में सौंपती रही।
काफी समय बीत जाने और लगातार हो रहे शोषण के बाद जब पीड़िता ने आरोपी से अपनी जिंदगी बर्बाद न करने और तत्काल शादी करने की बात कही तो वादों से मुकरते हुए आरोपी के तेवर बदल गए। आरोपी ने समाज और जाति का बहाना बनाते हुए साफ कह दिया कि तुम्हारी और हमारी शादी नहीं हो सकती क्योंकि तुम्हारा समाज हमारे समाज से छोटा है और घर वाले इसका विरोध कर रहे हैं।
जब पीड़िता ने इस धोखे झूठे प्यार और अनाचार का विरोध किया तो आरोपी ने उसके साथ गाली-गलौज की और शिकायत न करने को लेकर जान से मारने की धमकी देते हुए मारपीट भी की। अंततः हिम्मत जुटाकर पीड़िता ने बाराद्वार थाने में न्याय की गुहार लगाई और अपनी आपबीती बताई जिसके बाद पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता BNS और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला तो पंजीकृत कर लिया लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही नजर आ रही है।
जानकारी FIR के बाद बढ़ा दबाव
आरोपी के बहन और गांव के सरपंच पर समझौता को लेकर धमकाने की जानकारी मिली है,मामला दर्ज होने के बाद न्याय मिलने की बजाय पीड़िता की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आरोप है कि आरोपी पक्ष की बहन और उसके परिवार वाले लगातार पीड़िता पर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दे रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब इस संवेदनशील और महिला उत्पीड़न के मामले में गांव के सरपंच अमित राठौर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। सूत्रों के अनुसार, आरोपी पक्ष के बचाव में गांव के सरपंच ने भी पीड़िता को फोन किया था। फोन पर समझौता करने और दबाव बनाने के इस खेल में सरपंच और आरोपी की बहन दोनों शामिल बताए जा रहे हैं।
पीड़िता को फोन करके समझौते का दबाव बनाने और धमकाने के दावों की सच्चाई अब तकनीकी जांच के ऊपर निर्भर है। जानकारों का कहना है कि आरोपी पक्ष और गांव के सरपंच अमित राठौर के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाए तो इस पूरे नेक्सस का पर्दाफाश हो जाएगा। इस तकनीकी जांच से यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि इस संवेदनशील मामले को प्रभावित करने और पीड़िता पर दबाव के लिए संपर्क किया गया है या नहीं ।
मानवाधिकार संगठन की कड़ी आपत्ति और मदद का भरोसा
इस मामले क़ो लेकर कोरबा के मानवाधिकार संगठन ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन के पदाधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि महिला संबंधी अपराधों में किसी भी पीड़िता को डराना-धमकाना या समझौते के लिए विवश करना खुद में एक अत्यंत गंभीर और दंडनीय आपराधिक कृत्य है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। संगठन ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कानूनी, सामाजिक और नैतिक मदद देने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है।
उठते गंभीर सवाल
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल? थाना क्षेत्र से महज कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित किरारी गांव के नामजद आरोपी को पकड़ने में बाराद्वार पुलिस को 60 दिन क्यों लग गए? क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है या यह उसकी घोर लापरवाही है?
सरपंच की भूमिका पर सवाल एक जनप्रतिनिधि को महिला संबंधी इस प्रकार के गंभीर और संवेदनशील आपराधिक मामले में हस्तक्षेप करने फोन पर समझौता करने के लिए दबाव बनाने का अधिकार किसने दिया? क्या एक आरोपी को बचाने के लिए पद का दुरुपयोग किया जा रहा है?
सूत्रों की मानें तो आरोपी पक्ष को बचाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है और हर स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
भारतीय कानून व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। पुलिस प्रशासन को इस मामले में तत्परता दिखाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। पीड़िता को न्याय दिलाने और अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए आरोपी भूपेश साहू की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़िता को धमकाने वाले तत्वों जिसमें सरपंच भी शामिल हैं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की बेहद आवश्यकता है, ताकि कानून पर आम जनता का विश्वास बना रहे।



