कोरबा:- लोक शिक्षण संचनालाय, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गत 26 दिसंबर 2025 को अनुशंसित शिक्षक/ प्रधान पाठकों के व्याख्याता पद पर प्रमोशन के आदेश जारी हुए 6 माह बीत गए, लेकिन आज तक काउंसलिंग तक नही हो पाई है। कोरबा जिले के भी दर्जनों शिक्षक इस सूची में शामिल है, जो आदेश हाथ मे लिए काउंसलिंग व नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे है।
शिक्षा सत्र 2026- 27 के लिए आज से प्रदेश भर में शिक्षण संस्थाओं के पट खुल गए है। नियमतः इसके पूर्व पदोन्नत शिक्षकों की काउंसलिंग कराकर उन्हें नई शालाओं में पदस्थ करना था, ताकि सत्र की शुरुआत से ही पढ़ाई सुचारू रहे। किंतु 6 माह बाद भी प्रदेश के उन प्रमोटेड शिक्षकों का काउंसलिंग और नई नियुक्ति को लेकर शिक्षा मंत्रालय उदासीन है। प्रमोशन दिनांक 26/12/2025: डीपीआई ने आदेश क्रमांक स्था.2/ टी संवर्ग/ 13(1)/ 2026/ 605 जारी कर प्रदेश के सैकड़ो शिक्षक/ प्रधान पाठकों को व्याख्याता एलटी टी संवर्ग में पदोन्नत किया है। इसमें कोरबा जिले के भी दर्जनों शिक्षक शामिल है। काउंसलिंग का आदेश दिनांक 14/01/2026: डीपीआई ने आदेश क्रमांक स्था.2/ टी संवर्ग/ 13(1)/ 2026/ 628 जारी कर सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को काउंसलिंग के लिए दावा- आपत्ति 15/01/2026 तक मंगाने का निर्देश दिया। साथ ही लिखा कि काउंसलिंग हेतु दिनांक दावा- आपत्ति के निराकरण उपरांत पृथक से सूचित की जावेगी। लेकिन 14 जनवरी 2026 के आदेश के बाद आज 6 माह बीत गए पर काउंसलिंग की कोई तारीख घोषित नही की गई। नतीजा पदोन्नत शिक्षक 9300- 34800 ग्रेड पे 4300 के आदेश के बाद भी पुराने पद और पुराने वेतन पर काम करने को मजबूर है। कोरबा जिले के अधिकतर हाई/ हायर सेकंडरी स्कूलों में पहले ही व्याख्याता के पद खाली है। कई स्कूल एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे है। ऐसे में प्रमोशन के बाद भी शिक्षकों को नई पदस्थापना न देना शिक्षण कार्य को सीधे प्रभावित करेगा। ऐसे में बच्चों के पढ़ाई में कमी को लेकर आखिर जिम्मेदार कौन होगा? जबकि डीपीआई के प्रमोशन आदेश में स्पष्ट लिखा है कि पदोन्नति के 15 दिन के भीतर काउंसलिंग कराकर पदस्थापना की जाए, ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो, किंतु 6 माह बाद भी प्रक्रिया शुरू न होना सोचनीय पहलू है। सूत्रों के मुताबित काउंसलिंग और नई पदस्थापना को लेकर शिक्षा मंत्रालय में पेंच फंसा है। दावा- आपत्ति का निराकरण हो गया, वहीं काउंसलिंग शुरू करने के लिए डीपीआई ने 20 अप्रैल 2026 को फाइल अनुमोदन हेतु शिक्षामंत्री को भेज दी। किंतु मंत्री कार्यालय से अब तक अनुमोदन नही मिला है। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा भर्ती पदोन्नति नियम 2019 के तहत पदोन्नति के तत्काल बाद काउंसलिंग कराकर सत्र शुरू होने के पूर्व पदस्थापना देना अनिवार्य है, किंतु 6 माह की देरी सीधे नियमों की अवहेलना है। अब सवाल यह उठता है कि 6 माह से काउंसलिंग की तारीख क्यों नही निकली? शालाओं के पट खुल चुके है तो रिक्त स्कूलों में पदोन्नत व्याख्याता कब भेजे जाएंगे? प्रमोटेड शिक्षकों को एरियर सहित व्याख्याता का वेतनमान कब से मिलेगा? ऐसे में क्या शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में अधिकारी- मंत्री की सुस्ती के कारण हजारों बच्चों की पढ़ाई बर्बाद नही होगी?



