अंबिकापुर आदत से मजबूर और कानून से बेखौफ जी हां, सरगुजा के राशन घोटाले का बेताज बादशाह चावल माफिया’ अरुण बंसल प्रशासन के रडार पर आ गया है। गरीबों के पेट पर लात मारकर अपनी तिजोरी भरने वाले इस शातिर खिलाड़ी के काले कारनामों पर नकेल कसते हुए प्रशासन ने अरुण ट्रेडर्स की दुकान और गोदाम दोनों पर ताला (सील) जड़ दिया है
अब कड़ाके की तैयारी FIR की है, लेकिन शहर की जनता के मन में एक ही बड़ा सवाल तैर रहा है क्या इस बार सच में जेल की हवा खाएगा चावल माफिया अरुण बंसल, ‘सेटिंग’ का खेल चलेगा
फिर खुली पाप की पोटली कार्रवाई की इनसाइड स्टोरी
कहते हैं ना कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि अरुण ट्रेडर्स’ के जरिए सरकारी राशन के चावल (जो गरीबों के लिए आता है) की हेराफेरी का खेल धड़ल्ले से चल रहा है।
एक्शन मोड में टीम पुख्ता इनपुट मिलते ही प्रशासनिक अमला दलबल के साथ अरुण ट्रेडर्स के ठिकानों पर धमक पड़ा
दुकान-गोदाम सील जांच में गड़बड़ी मिलते ही अधिकारियों ने बिना वक्त गंवाए दुकान और गोदाम को सील कर दिया।
कागजी चक्रव्यूह तैयार सिर्फ सीलपत्ती पर बात खत्म नहीं हुई है, इस बार प्रशासन ‘फुल मूड’ में है और बंसल के खिलाफ FIR दर्ज कराने की तगड़ी लिखापढ़ी चल रही है
बड़ा सवाल कार्रवाई तो ठीक है साहब पर जेल कब
अंबिकापुर में यह चर्चा आम है कि अरुण बंसल के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं चावल माफिया’ पर कार्रवाई की गाज गिर चुकी है,
जनता की अदालत का सीधा सवाल
“गरीबों के हक का चावल उगलवाने वाली यह सील की कार्रवाई सिर्फ कुछ दिनों की औपचारिकता है, या इस बार सच में इस सफेदपोश माफिया को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा
प्रशासन ने दुकान और गोदाम सील करके अपनी मंशा तो साफ कर दी है, लेकिन असली इम्तिहान होना अभी बाकी है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार पुलिस और प्रशासन मिलकर इस चावल माफिया का परमानेंट इलाज’ करते हैं, या फिर अरुण बंसल अपनी पुरानी रसूख और जुगाड़ के दम पर सिस्टम को ठेंगा दिखा देगा



