कोरबा।
गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाला एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कोरबा के खाद्य विभाग की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। शहर के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में कागजों पर तो अनाज का अंबार लगा है, लेकिन जब जमीन पर हकीकत देखी गई, तो पैरों तले जमीन खिसक गई।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह करोड़ों का खेल? क्या वाकई इस पूरे सिंडिकेट के सूत्रधार खुद विभागीय अधिकारी हैं? ये वो सुलगते सवाल हैं जिनका जवाब आज पूरी कोरबा की जनता मांग रही है।
कागजों पर ‘महा-भंडारण’, दुकान में ‘सन्नाटा’!
मामला शहरी क्षेत्र का है, जिसकी कमान फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर के हाथों में है। हमारी टीम को मिले पुख्ता दस्तावेजों और इनपुट के अनुसार:
PDS दुकान ID नंबर: 551001052
पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन स्टॉक: लगभग 800 क्विंटल चावल
दुकान पर मौजूद वास्तविक (Physical) स्टॉक: मात्र 50 क्विंटल चावल
बड़ा सवाल: 800 क्विंटल के स्टॉक में से 750 क्विंटल (यानी करीब 75,000 किलो) चावल कहाँ गायब हो गया? क्या यह गरीबों का राशन खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया गया? इस 750 क्विंटल चावल की हेराफेरी किसके इशारे पर हुई?
शिकायत पर भी ‘मौन व्रत’, आखिर क्यों?
ऐसा नहीं है कि विभाग को इसकी भनक नहीं थी। हमारी टीम ने खुद कुछ महीनों पहले इस गंभीर गड़बड़ी की पुख्ता जानकारी फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर को दी थी। लेकिन कार्रवाई करना तो दूर, उन्होंने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न तो कोई जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई।
अधिकारियों का यह ‘मौन व्रत’ सीधे तौर पर इशारा करता है कि राशन माफियाओं को किसी बड़े रसूखदार का खुला संरक्षण प्राप्त है।
सवालों से भागे फूड इंस्पेक्टर, नहीं उठाया फोन
जब इस महा-घोटाले और 750 क्विंटल लापता चावल पर जवाब लेने के लिए हमारी मीडिया टीम ने फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर से संपर्क करने की कोशिश की, तो हर बार की तरह उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। ऐसा एक बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ है।
जब-जब PDS दुकानों में धांधली की बात आती है, तब-तब जिम्मेदार अधिकारी कैमरे और फोन से दूरी बना लेते हैं। आखिर यह डर किस बात का है? अगर आपकी नीयत साफ है, तो सामने आकर जवाब क्यों नहीं देते?
कलेक्टर और उच्च अधिकारियों से सीधे सवाल:
जनता के टैक्स के पैसे और गरीबों के राशन का यह 750 क्विंटल चावल किसकी जेब में गया?
बार-बार शिकायत के बाद भी फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर ने इस दुकान पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
क्या इस पूरे खेल में केवल नीचे के कर्मचारी शामिल हैं, या फिर ऊपर तक हिस्सेदारी पहुंच रही है?
हमारी मांग: इस पूरी राशन हेराफेरी की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो, दुकान का लाइसेंस निरस्त किया जाए और कर्तव्य में लापरवाही बरतने व संदिग्धों को संरक्षण देने के आरोप में संबंधित फूड इंस्पेक्टर पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
इस महा-घोटाले की एक-एक परत खुलने तक हमारी टीम इस खबर पर लगातार बनी हुई है…
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