कोरबा
गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाला एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने कोरबा के खाद्य विभाग की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। शहर के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में कागजों पर तो अनाज का अंबार लगा है, लेकिन जब जमीन पर हकीकत देखी गई, तो पैरों तले जमीन खिसक गई।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है यह करोड़ों का खेल क्या वाकई इस पूरे सिंडिकेट के सूत्रधार खुद विभागीय अधिकारी हैं ये वो सुलगते सवाल हैं जिनका जवाब आज पूरे कोरबा की जनता जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग रही है।
कागजों पर ‘महा-भंडारण’ दुकान में ‘सन्नाटा
मामला कोरबा शहरी क्षेत्र का है जिसकी सीधी कमान फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर के हाथों में है। खोजी टीम को मिले पुख्ता दस्तावेजों और ऑन-द-ग्राउंड इनपुट के अनुसार:
| विवरण | विवरण/आंकड़ा |
|—|—|
| PDS दुकान ID नंबर| 551001052
| पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन स्टॉक | लगभग 800 क्विंटल चावल |
| भौतिक (Physical) स्थिति | मात्र 50 क्विंटल चावल उपलब्ध |
| सीधा घपला | 750 क्विंटल (75,000 किलो) चावल नदारद |
> बड़ा सवाल 800 क्विंटल के ऑनलाइन रिकॉर्ड में से 750 क्विंटल (यानी करीब 75,000 किलोग्राम) चावल आखिर कहाँ वाष्पीकृत हो गया? क्या गरीबों के हक का यह राशन खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर अपनी जेबें गर्म कर ली गईं?
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17 जुलाई को खबर उजागर, फिर भी अधिकारियों का ‘मौन व्रत’!
यह महज एक दिन की लापरवाही नहीं, बल्कि सोची-समझी साठगांठ का नतीजा है। इस गंभीर गड़बड़ी का खुलासा सबसे पहले 17 जुलाई 2026 को वेब पोर्टल न्यूज में खबर के माध्यम से हुआ था। मीडिया टीम ने इससे महीनों पहले भी फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर को इस धांधली के पुख्ता प्रमाण सौंपे थे
लेकिन हफ्ता बीत जाने और खबर छपने के बावजूद ना तो कोई जांच हुई, ना एफआईआर (FIR) दर्ज हुई और ना ही दुकान का लाइसेंस निरस्त किया गया
PDS दुकान ID 551001052 पर आज तक एक अदद औपचारिक प्रकरण तक दर्ज न होना यह साबित करता है कि खाद्य विभाग में कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती की कला सीखी गई है। सवालों से भागे जिम्मेदार: फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा
जब इस महा-घोटाले और 750 क्विंटल गायब चावल पर जवाब मांगने के लिए मीडिया टीम ने जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क साधा, तो जो रवैया सामने आया वह बेहद शर्मनाक है:
फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर कई बार फोन मिलाने के बावजूद उन्होंने हर बार की तरह फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। जब-जब PDS राशन में धांधली का जिन्न बाहर आता है, संतोष कंवर जी कैमरे और फोन से दूरी बना लेते हैं। आखिर यह डर किस बात का है
खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंग मामले की गंभीरता को देखते हुए जब शीर्ष अधिकारी यानी जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंग जी को फोन लगाया गया, तो उन्होंने भी कोई जवाब नहीं दिया।
जब निचले स्तर के इंस्पेक्टर से लेकर जिला स्तर के शीर्ष खाद्य अधिकारी तक फोन से भागने लगें, तो जनता क्या समझे क्या यह ‘मौन व्रत’ इस बात का सीधा प्रमाण नहीं है कि इस पूरे राशन माफिया नेटवर्क को विभागीय अफसरों की शह और संरक्षण हासिल है
1. गरीबों के हक का 75,000 किलो सरकारी राशन किसकी जेब में गया और इसका वित्तीय लाभ किसको पहुंचा
2. 17/07/2026 को मीडिया में खबर उजागर होने और उससे महीनों पहले दी गई शिकायत के बाद भी दुकान ID 551001052 पर अब तक कोई वैधानिक प्रकरण दर्ज क्यों नहीं हुआ?
3. जिम्मेदार फूड इंस्पेक्टर संतोष कंवर पर मामले को दबाने और कर्तव्यहीनता के लिए अब तक निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
4. खाद्य अधिकारी घनश्याम सिंग जी का इस मामले से पल्ला झाड़ना और मीडिया के सवालों से भागना क्या उनकी संलिप्तता की ओर इशारा नहीं करता
5. रिकवरी और एफआईआर क्या जिला प्रशासन इस महा-घोटाले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर एफआईआर दर्ज कराएगा और गायब राशन की बाजार दर पर वसूली करेगा





