106 पीड़ितों को मिला लाभ, 20 गुम मोबाइल लौटाए गए, ₹50 हजार तक की राशि के लिए MRM और फ्रिज खातों के लिए GRM पोर्टल की दी गई जानकारी
जांजगीर-चांपा SN india News भारत सरकार की नई गाइडलाइन के तहत साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाने के उद्देश्य से जांजगीर-चांपा जिले में पहली बार एक दिवसीय विशेष पुलिस सहायता शिविर का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन में 27 जुलाई 2026 को साइबर थाना जांजगीर में आयोजित इस शिविर में जिले सहित सक्ती, कोरबा और बलरामपुर से आए कुल 106 साइबर ठगी पीड़ितों ने भाग लिया।
शिविर के दौरान साइबर अपराध से जुड़े मामलों की समीक्षा कर कुल ₹8,98,310 की राशि की वापसी के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। इनमें ₹50 हजार से कम की होल्ड राशि वाले 17 मामलों में ₹77,310 की वापसी के लिए MRM (मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कराया गया, जबकि ₹50 हजार से अधिक होल्ड राशि वाले 10 मामलों में कुल ₹8,21,000 की वापसी के लिए न्यायालय में आवेदन भेजा गया।
इसके अलावा 47 पीड़ितों के फ्रिज बैंक खातों को डिफ्रिज कराने के लिए GRM (ग्रेविएंस रिड्रेसल मैकेनिज्म) पोर्टल के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों सहित आवेदन तैयार कर संबंधित प्रक्रिया शुरू कराई गई।
20 लोगों को मिले उनके गुम मोबाइल
शिविर में साइबर थाना पुलिस ने 20 गुम मोबाइल फोन भी उनके वास्तविक मालिकों को सौंपे। पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक 636 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है, खोजकर उनके मालिकों को वापस दिलाए जा चुके हैं।
क्या है GRM और MRM पोर्टल?
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि GRM पोर्टल उन पीड़ितों के लिए है जिनके बैंक खाते किसी साइबर मामले में होल्ड या फ्रिज हो गए हैं। ऐसे लोग अपने निकटतम बैंक शाखा के माध्यम से GRM पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर खाते को डिफ्रिज कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
वहीं MRM (मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल) उन मामलों के लिए है, जिनमें ₹50 हजार से कम की राशि होल्ड हुई है। इस पोर्टल के माध्यम से बिना एफआईआर या न्यायालय की प्रक्रिया के ऑनलाइन आवेदन कर राशि वापस प्राप्त की जा सकती है। जबकि ₹50 हजार से अधिक की राशि के मामलों में न्यायालय के आदेश की आवश्यकता होती है।
साइबर अपराधों से बचने की अपील
शिविर के दौरान पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंकिंग विवरण या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, ऑनलाइन लोन, केवाईसी अपडेट, सोशल मीडिया हैकिंग जैसी साइबर ठगी के तरीकों से सतर्क रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करे अथवा NCRP पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए, ताकि समय रहते राशि होल्ड कर पीड़ित को राहत दिलाई जा सके।
शिविर का संचालन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप के मार्गदर्शन तथा सीएसपी योगिताबाली खापर्डे के नेतृत्व में किया गया। साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक भास्कर शर्मा सहित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शिविर के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



