कोरबा। JCB एजेंसी दिलाने के नाम पर कोरबा के एक व्यापारी से कथित ठगी के मामले में कटघोरा थाने में अपराध दर्ज किया गया था। अब इसी मामले की जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम की यात्रा को लेकर भारी अनियमितता के आरोपों ने पूरे पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
आरोप है कि आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस टीम को ट्रेन से जाना था, लेकिन टीम ने ट्रेन की जगह हवाई सफर किया और इस यात्रा के लिए पीड़ित से जुड़े पैसों का इस्तेमाल किया गया। मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो बिलासपुर IG रामगोपाल गर्ग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए निरीक्षक समेत 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया।
मामला कोरबा के व्यापारी से JCB एजेंसी दिलाने के नाम पर हुई कथित ठगी से जुड़ा है। शिकायत के बाद कटघोरा थाने में अपराध दर्ज हुआ और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम को दूसरे स्थान पर भेजे जाने की कार्रवाई हुई।लेकिन गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान यात्रा और पैसों के इस्तेमाल को लेकर ऐसी अनियमितता सामने आई कि मामला पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया।
सबसे बड़ा सवाल पुलिस टीम की यात्रा को लेकर है। आरोप है कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम को ट्रेन से रवाना होना था, लेकिन इसके बजाय पुलिसकर्मियों ने हवाई यात्रा की। सवाल यह भी है कि ट्रेन से होने वाली यात्रा की जगह फ्लाइट का फैसला आखिर किसने लिया? और उससे भी बड़ा सवाल—इस हवाई यात्रा का खर्च किस पैसे से किया गया?आरोप है कि इस पूरी यात्रा में पीड़ित से जुड़े पैसों का इस्तेमाल हुआ। यदि ऐसा हुआ है तो यह पुलिस कार्रवाई के दौरान धन के इस्तेमाल और प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
IG ने निरीक्षक समेत 8 को किया सस्पेंड
मामला सामने आने के बाद बिलासपुर IG रामगोपाल गर्ग ने कार्रवाई करते हुए इन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है—
- निरीक्षक मोती पटेल
- उप निरीक्षक राम पाण्डेय, प्रभारी अधिकारी
- आरक्षक 747 प्रदीप राठौर, थाना कटघोरा
- प्रधान आरक्षक 381 गुनाराम सिन्हा
- आरक्षक 41 सुशील यादव, साइबर सेल
- प्रधान आरक्षक 392 गोपाल यादव
- प्रधान आरक्षक 35 राजेश कंवर
- आरक्षक 08 प्रशांत सिंह, रक्षित केंद्र कोरबा
अब जांच में खुलेंगे कई राज
IG की कार्रवाई के बाद अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ट्रेन की जगह फ्लाइट से जाने का निर्णय किसने लिया, हवाई यात्रा के लिए किस रकम का इस्तेमाल किया गया, रकम किसके माध्यम से उपलब्ध हुई और इस पूरी प्रक्रिया में किस अधिकारी या कर्मचारी की क्या भूमिका थी।JCB एजेंसी के नाम पर व्यापारी से कथित ठगी से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस की कार्रवाई, यात्रा खर्च और कथित वित्तीय अनियमितता तक पहुंच गया है।
फिलहाल 8 पुलिसकर्मियों के निलंबन से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब सबकी नजरें विभागीय जांच पर हैं—क्योंकि सवाल सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि गिरफ्तारी के नाम पर हुए खर्च और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता का भी है।































