राजधानी रायपुर के आसपास के छोटे कस्बों और शहरों से पढ़ाई या छोटी-मोटी नौकरी के लिए आने वाली कुछ लड़कियाँ बहुत जल्दी इस शहर की चकाचौंध और तड़कती-भड़कती नाइट लाइफ़ के आकर्षण में फँस जाती हैं।
रात होते ही रायपुर के कई इलाकों में शराब, पार्टियों और कथित तौर पर नशे के कारोबार की अपनी अलग ही दुनिया सज जाती है। क्लब में डिनर-ड्रिंक का बिल हजारों में और किसी मॉल में फिल्म देखने का खर्च भी जेब पर भारी पड़ने लगा है। ऊपर से रोज़ नई ड्रेस, महँगे जूते, मेकअप, सैलून और इंस्टाग्राम पर दिखाई देने वाली लाइफ़स्टाइल—यानी कमाई दस हजार और खर्च ऐसा जैसे नोटों की फैक्ट्री घर के पीछे लगी हो।
अब सवाल यह है कि पाँच-दस हजार रुपये महीने कमाने वाली कोई लड़की यह सब खर्च कहाँ से करेगी?
यहीं से रायपुर की इस आधुनिक अर्थव्यवस्था में एक नया निवेशक प्रवेश करता है जिसका नाम है शुगर डैडी।
शुगर डैडी यानी वह अधेड़ या बुजुर्ग करोड़पति, जिसे अचानक अपनी उम्र से आधी उम्र की खूबसूरत लड़की में जीवन का खोया हुआ रोमांच दिखाई देने लगता है। वह लड़की को क्रेडिट कार्ड थमा देता है और बदले में उसे क्या मिलता है, यह लिख दिया तो व्यंग्य की जगह शब्दकोश ही शर्मिंदा हो जाएगा। इसलिए समझदार पाठक संकेत से काम चला लें।
साधो मजे की बात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में लड़की का एक बॉयफ्रेंड भी अक्सर मौजूद रहता है और उसे शुगर डैडी से कोई विशेष आपत्ति नहीं होती। आखिर महँगाई के इस दौर में प्रेम भी अब कुछ-कुछ ‘को-ऑपरेटिव मॉडल’ पर चलने लगा है।
कहा जाता है कि इंस्टाग्राम अब केवल रील और सेल्फी का प्लेटफॉर्म नहीं रहा; वहाँ रिश्ते, नेटवर्किंग और कभी-कभी आर्थिक प्रायोजक की तलाश भी चलती रहती है। लेखक यह बात हवा में नहीं कह रहा वो ऐसे कई शुगर डैडी को व्यक्तिगत रूप से जानता है, जिनकी ‘बेबी’ उन्हें इंस्टाग्राम पर मिली है।
फिर शुगर डैडी भी कम दिलचस्प प्रजाति नहीं है। किसी ने विग लगवा ली है, किसी ने तोंद कम करवाने का ऑपरेशन करा लिया है और किसी ने तो शरीर की पुरानी पड़ चुके‘ट्रांसफॉर्मर की वायरिंग’ तक अच्छे मैकेनिक यानी डॉक्टर से बदलवा ली है।
कुल मिलाकर मामला बड़ा दिलचस्प है—एक तरफ इंस्टाग्राम पर जवानी फ़िल्टर लगाकर चमक रही है, दूसरी तरफ बुढ़ापा प्लास्टिक सर्जरी और क्रेडिट कार्ड के सहारे जवानी का सब्सक्रिप्शन लेने में लगा है।
और इस पूरी कहानी में सबसे महँगी चीज़ शायद शराब, ड्रेस या क्लब नहीं है—सबसे महँगी चीज़ वह दिखावा है, जिसमें इंसान अपनी औकात से बड़ी जिंदगी जीने की कोशिश करता है। रायपुर की रातें इसलिए चमक रही हैं क्योंकि शहर में रोशनी बहुत है; बस यह तय करना बाकी है कि इस रोशनी में कौन अपना भविष्य देख रहा है और कौन अपना क्रेडिट कार्ड।
























