सहरसा सदर अस्पताल में प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार के साथ कथित मारपीट की घटना बेहद गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता।
डॉक्टर जैसे जिम्मेदार और सम्मानित पद पर बैठे व्यक्ति से मर्यादित भाषा, संयमित व्यवहार और कानून के प्रति सम्मान की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी पत्रकार के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुई घटना नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
पत्रकार अपना दायित्व निभाते हुए जनता के सवालों और समस्याओं को सामने लाते हैं। सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार है और उसका जवाब हिंसा या दबाव से नहीं, बल्कि तथ्यों और कानून के दायरे में दिया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ तत्काल नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। किसी पद, वर्दी या प्रतिष्ठा के आधार पर किसी को कानून से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
कानून सभी के लिए समान है—चाहे वह डॉक्टर हो, पत्रकार हो या कोई अन्य व्यक्ति।
पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।



