कोरबा। जिले में रेत के अवैध उत्खनन और भंडारण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच चुइया क्षेत्र के जंगल में बड़ी मात्रा में रेत के कथित भंडारण का मामला सामने आया है। सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत नदी से निकालकर जंगल तक कैसे पहुंच रही है और इसके पीछे किन-किन लोगों की भूमिका है?
मौके पर मौजूद रेत के बड़े भंडार यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि यदि नदी से लगातार रेत निकाली जा रही है, तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग को इन भंडारण स्थलों की जानकारी है या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?
🔎 मीडिया कवरेज के दौरान सामने आया नाम
मीडिया टीम द्वारा मौके की कवरेज के दौरान वेदप्रकाश नाम सामने आने की जानकारी मिली है। सूत्रों के अनुसार, उक्त व्यक्ति से जुड़े होने का दावा किया जा रहा एक भंडारण स्थल भी मौके पर बताया गया। हालांकि, इस संबंध में वास्तविकता क्या है और भंडारण वैध है या अवैध—यह खनिज विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मौके से संबंधित फोटो और वीडियो मीडिया टीम द्वारा खनिज विभाग के अधिकारी को उपलब्ध करा दिए गए हैं, ताकि विभाग स्थल का सत्यापन कर नियमानुसार कार्रवाई कर सके।
⚠️ अब सवाल कार्रवाई का
जब इतनी बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण सामने आ रहा है, तो बड़ा सवाल यह है कि रेत आखिर कहां से आई? किसकी अनुमति से भंडारण किया गया? परिवहन के लिए वैध दस्तावेज हैं या नहीं? और यदि रेत अवैध रूप से निकाली गई है तो इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं?
यह मामला सिर्फ एक भंडारण स्थल का नहीं, बल्कि नदी से रेत उत्खनन से लेकर परिवहन और जंगल में डंपिंग तक की पूरी श्रृंखला की जांच का विषय बनता है।
अब देखना होगा कि फोटो-वीडियो सामने आने के बाद खनिज विभाग मौके पर पहुंचकर जांच करता है या नहीं, और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।
चुइया के जंगल में रेत का यह बड़ा भंडारण अब प्रशासन के लिए जांच की खुली चुनौती बन चुका है। जरूरत है कि सिर्फ भंडारण स्थल नहीं, बल्कि रेत के स्रोत, परिवहन, दस्तावेज और इससे जुड़े सभी लोगों की भूमिका की भी जांच हो।
SN इंडिया न्यूज की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।




