कोरबा (छत्तीसगढ़)।
कोरबा जिले के बालको वन परिक्षेत्र अंतर्गत चुईया नाला में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष राजकुमार दुबे ने इस पूरे मामले में खनिज अमले और रेत सिंडिकेट की मिलीभगत का बड़ा आरोप लगाते हुए कोरबा कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
जेसीबी से साक्ष्य नष्ट करने का संगीन आरोप
लोजपा जिलाध्यक्ष का आरोप है कि चुईया नाला में लंबे समय से बेखौफ होकर अवैध खनन किया जा रहा था। ग्रामीणों की शिकायत और समाचारों में मामला सामने आने के बाद जब खनिज अमले (जिसमें खनिज निरीक्षक मदन साहू, अजय कुमार राठौर, शिव कुमार जांगड़े, धर्मेंद्र गुप्ता एवं सिपाही संजू लहरे शामिल थे) की टीम मौके पर पहुंची, तो नियमों के तहत जब्ती पत्रक बनाने और नापजोख करने के बजाय जेसीबी चलाकर डंप की गई रेत को मिट्टी में मिला दिया गया। आरोप है कि ऐसा करके अपराध के साक्ष्यों को नष्ट करने और सिंडिकेट को कानूनी दंड से बचाने की कोशिश की गई है।
एनजीटी नियमों की धज्जियां और राजस्व का नुकसान
शिकायत पत्र के अनुसार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों (सरपंच, उपसरपंच और सरपंच पति) और रेत माफिया के बीच साठगांठ से हजारों घन मीटर रेत का अवैध भंडारण किया गया था। नियमानुसार इस रेत को जब्त कर नीलाम किया जाना चाहिए था, जिससे शासन को लाखों रुपये का राजस्व मिलता। लेकिन खनिज अधिकारियों की इस कार्यप्रणाली से न केवल शासन को भारी वित्तीय क्षति हुई है, बल्कि छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 तथा खान और खनिज विकास अधिनियम, 1957 के प्रावधानों का भी खुला उल्लंघन हुआ है।
निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग

लोजपा ने ज्ञापन में स्पष्ट मांग की है कि:
* इस पूरे मामले में संलिप्त खनिज अधिकारियों व कर्मचारियों तथा रेत सिंडिकेट पर बीएनएस (BNS) व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नामजद मामला दर्ज किया जाए।
* घटना के दिन मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों और रेत माफिया के बीच हुए मोबाइल संपर्कों का कॉल डिटेल, टावर लोकेशन और साइबर सेल से फॉरेंसिक जांच कराई जाए।
* पूरे मामले की जांच खनिज विभाग के बजाय पुलिस थाने के माध्यम से निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और दोषियों की व्यक्तिगत संपत्ति व वेतन से नुकसान की भरपाई की जाए।
इस ज्ञापन की प्रतिलिपि खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग और वन विभाग कोरबा को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
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