कोरबा। जिले में नशे का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस लगातार कार्रवाई कर नशे के कारोबारियों को जेल भेज रही है, लेकिन आबकारी विभाग की लापरवाही और कथित मिलीभगत से यह धंधा और पनपता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले के अलग-अलग मोहल्लों और गलियों में नशीले पदार्थों की बिक्री अब आम बात हो गई है। पुलिस प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता है और आरोपियों पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज देता है। लेकिन आबकारी विभाग, जिसका सीधा दायित्व है इस अवैध कारोबार को रोकना, वह कार्रवाई करने की बजाय कथित रूप से “सेटलमेंट” में व्यस्त नजर आता है।
ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि विभाग के कुछ अधिकारी न तो मामले दर्ज करते हैं और न ही छापेमारी करते हैं, बल्कि आरोपियों से ‘महीना’ लेकर उन्हें खुली छूट दे देते हैं। यही वजह है कि जिले में नशे का कारोबार खत्म होने की बजाय और तेज़ी से फैलता जा रहा है।
इस मामले में जब आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि शिकायतें उन्हें लिखित में भेजी जाएं, वे कार्रवाई करेंगे। लेकिन शिकायत भेजे जाने के बाद भी निचले स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विभागीय अधिकारियों पर आरोप है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ‘राजा’ बने हुए हैं और बिना केस दर्ज किए केवल अपनी जेबें गरम कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इससे पुलिस प्रशासन पर भी बेवजह सवाल उठते हैं, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है। अब देखना यह होगा कि जिले के कप्तान और शासन स्तर से कब इस मामले पर सख्ती दिखाई जाती है और नशे के कारोबार पर लगाम लगती है।
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