कोरबा शहर का बायपास रोड आजकल कबाड़ियों की मनमानी का केंद्र बन चुका है। सड़क किनारे जगह-जगह कबाड़ के ढेर, लोहा-पीतल के अवशेष, पुराने वाहन के पुर्जे और प्लास्टिक के जले हुए टुकड़े अब आम नज़ारा बन गए हैं। ये कबाड़ी न केवल सड़कों पर अतिक्रमण कर रहे हैं बल्कि खुलेआम अवैध रूप से कबाड़ की खरीदी-बिक्री भी कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कबाड़ियों ने धीरे-धीरे सड़क किनारे अपने कबाड़ को जमा कर अस्थाई रूप से दुकानें खड़ी कर ली हैं। कुछ समय बाद वही अस्थाई ढांचा स्थायी कब्जे में बदल जाता है। इससे न केवल यातायात में बाधा उत्पन्न होती है, बल्कि आस-पास रहने वालों को बदबू, धुएं और गंदगी से भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।
अवैध कारोबार और प्रशासन की चुप्पी
जानकारी के अनुसार, कई कबाड़ी बिना किसी पंजीकरण या लाइसेंस के लोहा-लोहे की चीजें, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रैप और वाहन पार्ट्स की अवैध खरीद-बिक्री कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर तो जली हुई वायरों से तांबा निकालने के लिए खुले में प्लास्टिक जलाया जाता है, जिससे जहरीला धुआं पूरे क्षेत्र में फैल जाता है।
स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन को शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल खानापूर्ति की गई है। प्रशासन की लापरवाही से इन कबाड़ियों का हौसला बढ़ता जा रहा है।
बायपास रोड पर बढ़ता खतरा
बायपास रोड वैसे भी भारी वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। किनारे जमा कबाड़ और ट्रकों की अनियमित पार्किंग से दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है। राहगीरों को सड़क किनारे चलते समय अकसर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिला प्रशासन और नगर निगम को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। सड़क किनारे हो रहे अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए और बिना अनुमति संचालित हो रहे कबाड़ी कारोबार पर रोक लगाई जाए। साथ ही, पुलिस को अवैध खरीदी-बिक्री करने वालों पर आर्थिक दंड और कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
कोरबा जैसे विकसित हो रहे औद्योगिक जिले में इस तरह की अवैध गतिविधियाँ न केवल शहर की छवि खराब कर रही हैं, बल्कि पर्यावरण और नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। यदि प्रशासन ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो आने वाले दिनों में यह अतिक्रमण और अवैध कारोबार और भी फैल सकता है


