कोरबा (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन का कारोबार अब इस हद तक बेलगाम हो चुका है कि सच्चाई दिखाने वाले पत्रकारों को भी खुलेआम धमकियाँ दी जा रही हैं। बालको थाना क्षेत्र अंतर्गत ध्यानपारा इलाके में लंबे समय से रेत माफिया का आतंक व्याप्त है, जहाँ रोजाना बिना रॉयल्टी के रेत से भरे ट्रैक्टर सड़कों पर फर्राटा भरते देखे जा सकते हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह अवैध कारोबार कोई नया नहीं है, बल्कि कई वर्षों से लगातार चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि रेत माफिया को कहीं न कहीं संरक्षण प्राप्त है।
पत्रकारों ने किया अवैध रेत परिवहन का खुलासा
इसी कड़ी में हाल ही में चार पत्रकारों ने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए ध्यानपारा क्षेत्र से गुजर रहे बिना रॉयल्टी के रेत से भरे ट्रैक्टरों की वीडियो रिकॉर्डिंग कर न्यूज़ कवरेज की। यह कवरेज अवैध खनिज चोरी के पुख्ता सबूत के रूप में सामने आई।
संजय पटेल नामक व्यक्ति ने दी खुली धमकी
वीडियो कवरेज के दौरान संजय पटेल नामक व्यक्ति मौके पर पहुँचा और पत्रकारों को उंगली दिखाते हुए धमकाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, संजय पटेल ने पत्रकारों से कहा—
“देख लूंगा तुम लोगों को”,
जो कि एक स्पष्ट धमकी मानी जा रही है।
बालको थाने में नामजद शिकायत दर्ज
धमकी की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों ने एकजुट होकर बालको थाना में संजय पटेल के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने शिकायत स्वीकार कर ली है और मामले की जाँच की बात कही जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
ध्यानपारा क्षेत्र में रोजाना हो रहे अवैध रेत परिवहन के बावजूद खनिज विभाग, पुलिस और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या प्रशासन को इस अवैध कारोबार की जानकारी नहीं?
या फिर जानबूझकर आँखें मूँदी जा रही हैं?
पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल
यह घटना न सिर्फ अवैध खनन का मामला है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला भी है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को डराने की कोशिश गंभीर चिंता का विषय है। यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो आम जनता की आवाज़ कैसे उठेगी?
मांग: सख्त कार्रवाई और संरक्षण
पत्रकार संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि—
संजय पटेल पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
अवैध रेत खनन और परिवहन पर तत्काल रोक लगे
पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराई जाए
पूरे नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच हो
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।




