Chhattisgarh/ korba
ऊर्जाधानी कोरबा के चंद्रनगर क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। कोयला खदानों से निकलने वाले मलबे और पत्थर युक्त मिट्टी ob के निपटारे को लेकर नीलकंठ कंपनी के कामकाज पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंपनी खदान से निकाली गई इस मिट्टी को नियमानुसार डंप करने के बजाय सीधे बिचौलियों के हवाले कर रही है।
खदान संचालन के नियमों के तहत, कोयला निकालने के दौरान निकलने वाली पत्थर युक्त मिट्टी और मलबे को निर्धारित डंपिंग यार्ड में ही डंप किया जाना होता है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। लेकिन चंद्रनगर क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर खेल खेला जा रहा है।
आरोप है कि नीलकंठ कंपनी इस बेशकीमती और व्यावसायिक रूप से उपयोगी मलबे को सीधे बिचौलियों को सौंप रही है। ये बिचौलिए इस मिट्टी और पत्थरों को निजी तौर पर ऊंचे दामों में बेचकर अवैध मुनाफा कमा रहे हैं l
इस अवैध परिवहन और बिचौलियों की सक्रियता के कारण चंद्रनगर और आसपास के इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही अचानक बढ़ गई है। इससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, बल्कि उड़ती धूल के कारण स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया खदान की गाड़ियों का कोई तय रूट नहीं रह गया है। बिचौलियों के इशारे पर गाड़ियाँ कहीं भी मिट्टी गिरा रही हैं। प्रशासन को इसकी भनक है या नहीं, यह समझ से परे है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल क्या नीलकंठ कंपनी के पास इस पत्थर युक्त मिट्टी को बिचौलियों को सौंपने की कानूनी अनुमति है?
खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन इस पूरे मामले पर चुप क्यों है?
राजस्व की हानि खदान से निकलने वाली सामग्री पर शासन का अधिकार होता है। इस तरह बिचौलियों को फायदा पहुँचाने से शासन को मिलने वाले राजस्व को सीधे तौर पर चूना लगाया जा रहा है।
चंद्रनगर के सजग नागरिकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस अवैध खेल को तुरंत नहीं रोका गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में नीलकंठ कंपनी और बिचौलियों के गठजोड़ पर क्या कार्रवाई करता है।






