तमिलनाडु में कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया। किसी को भनक तक नहीं थी, कोई वीआईपी सायरन नहीं, कोई पहले से तय काफिला नहीं—और अचानक मुख्यमंत्री थलापति विजय सीधे एक स्थानीय पुलिस थाने के दरवाजे पर पहुंच गए!
जैसे ही SHO साहब और थाने के बाकी स्टाफ ने सामने अपने मुख्यमंत्री को खड़े देखा, सब दंग रह गए। थाने का रजिस्टर चेक हुआ, आम जनता की शिकायतों की स्थिति देखी गई और साफ संदेश दिया गया—जनता की सेवा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
बिना पूर्व सूचना निरीक्षण जब सिस्टम को यह पता ही न हो कि सीएम कब, कहां और किस दफ्तर में औचक निरीक्षण के लिए पहुंच जाएंगे, तो लापरवाही अपने आप खत्म हो जाती है।
नेतृत्व खुद मैदान में डट जाता है, तो जनता का भरोसा लोकतंत्र पर और ज्यादा गहरा हो जाता है।


















