कोरबा/पाली:- मंडी में धान खरीदी इस बार ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल एप और ऑनलाइन प्रणाली के कारण बेहद सुव्यवस्थित, पारदर्शी और किसान हितैषी हो गई है। जिससे किसानों को घर बैठे टोकन मिल रहे है, केंद्रों में भीड़ कम हुई है तथा तौल, बारदाना, भंडारण व भुगतान की प्रक्रिया समय पर एवं सहज हो गई है। जिससे किसानों के चेहरे पर संतोष है और वे इसे बड़ी राहत बता रहे है। यह व्यवस्था किसानों को बिना किसी भागदौड़ के अपना धान बेचकर आर्थिक लाभ कमाने का अवसर दे रही है। जिससे उनकी आय बढ़ी है और वे अपने सपनो को साकार कर पा रहे है। धान खरीदी के लिए जिले के सभी केंद्रों में व्यापक इंतजाम किए गए है। किसानों को धान बेचने में किसी तरह की समस्या न हो और अवैध रूप से धान की बिक्री न हो इसे लेकर प्रशासन द्वारा विशेष सजगता बरती जा रही है। चैतमा उपार्जन केंद्र में भी किसानों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए खरीदी केंद्र को परिवर्तित करते हुए समीपतम गोपालपुर में व्यापक रूप से व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई है। जिला प्रशासन के जहां बेहतर प्रबंधन के कारण किसानों को इस खरीदी केंद्र में धान विक्रय करने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नही करना पड़ रहा है। यहां अपना धान बेचने आए किसानों ने धान रखने की पर्याप्त जगह, उपलब्ध सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। किसानों ने कहा कि टोकन प्रक्रिया सरल है और इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन से तौल तेज एवं सटीक हो रही है। खरीदी केंद्र में छाया, पेयजल, बैठक व्यवस्था सहित किसानों हेतु आवश्यक सुविधाएं सुव्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई गई है। किसानों ने शासन- प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की स्पष्ट नीतियों और प्रशासन के समयबद्ध प्रयासों के कारण ही खरीदी प्रक्रिया पारदर्शी, सुगम और विश्वसनीय बन गई है। इससे किसानों का विश्वास और उत्साह दोनों बढ़ा है। उल्लेखनीय है कि शासन द्वारा धान खरीदी प्रति क्विंटल 3100 रुपए की दर से की जा रही है, साथ ही किसानों के लिए 21 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा निर्धारित की गई है। यह कार्य आगामी 31 जनवरी 2026 तक जारी रहेगा। उचित मूल्य एवं समय पर खरीदी के कारण किसानों की अपनी मेहनत का उचित प्रतिफल प्राप्त हो रहा है, जिससे जिलेभर में सकारात्मक माहौल बना हुआ है।
छोटे किसान एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानियों व सीमित टोकन जारी होने के चलते हलाकान
एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानियों और सीमित टोकन जारी होने से छोटे किसान खरीदी केंद्रों तक पहुँच नही पा रहे है। उनका कहना है कि जैसे ही ऑनलाइन टोकन खुलता है, तुरंत लिमिट खत्म हो जाती है। बड़े और तकनीकी रूप से सक्षम किसान तो किसी तरह टोकन ले लेते है, लेकिन छोटे किसान लगातार वंचित रह जा रहे है। यही कारण है कि अधिकांश किसान धान मिंजाई के बाद भी फसल बेच नही पा रहे है। धान बेचने का मौका न मिलने के कारण किसान अपनी उपज को आंगन और कोठारों में भरकर रखे हुए है। चोरी के भय से कई किसान तो ठिठुरन वाले सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे पहरा दे रहे है। अधिया में खेती करने वाले किसानों की स्थिति और कठिन है, उन्होंने ब्याज पर पैसा लेकर फसल बोई थी और समय पर भुगतान न होने से ब्याज बढ़ने का डर सता रहा है। ऐसे में पंजीयन से लेकर टोकन हासिल करने तक की लंबी मशक्कत ने छोटे किसानों को भारी परेशानी में डाल दिया है।


