कोरबा। कोरबा जिले सहित पूरे बिलासपुर रेंज में चोरी के माल की खरीद-फरोख्त तथा अवैध कबाड़ कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार उदय चौधरी ने पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज को पत्र सौंपकर कबाड़ कारोबार के लिए अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और रिकॉर्ड आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
उदय चौधरी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य वैध कबाड़ कारोबार को बंद करवाना या ईमानदारी से व्यवसाय करने वाले कबाड़ व्यापारियों को परेशान करना नहीं है। बल्कि उनका उद्देश्य यह है कि वैध कारोबार को स्पष्ट नियमों के तहत संरक्षण मिले और चोरी के सामान की खरीद-फरोख्त करने वाले लोगों तथा अवैध गतिविधियों में शामिल नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि कबाड़ व्यवसाय रोजगार, पुनर्चक्रण और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण कारोबार है। इसलिए पूरे कारोबार को संदेह की नजर से देखने के बजाय इसे लाइसेंस, सत्यापन और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की व्यवस्था के माध्यम से व्यवस्थित किया जाना चाहिए।
चोरी के माल के पूरे नेटवर्क की हो जांच
उदय चौधरी ने कहा कि चोरी की किसी घटना की जांच केवल कथित चोर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। चोरी के सामान की खरीद, भंडारण, परिवहन और आगे बिक्री की पूरी कड़ी की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस को यह भी पता लगाना चाहिए कि चोरी का सामान किसने खरीदा, वह किस कबाड़ दुकान या गोदाम तक पहुंचा, उसका परिवहन किस माध्यम से हुआ और आगे उसे किसे बेचा गया।
यदि इस पूरी कड़ी की जांच की जाए तो चोरी का माल खपाने वाले संभावित नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
सभी कबाड़ दुकानों और गोदामों का हो सत्यापन
उदय चौधरी ने मांग की कि पुलिस एवं जिला प्रशासन के समन्वय से जिले में संचालित कबाड़ दुकानों, गोदामों एवं स्क्रैप कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों का व्यापक सत्यापन कराया जाए।
सत्यापन के दौरान व्यवसायी की पहचान, प्रतिष्ठान एवं गोदाम का वास्तविक पता, आवश्यक पंजीयन/अनुमतियां, व्यवसाय की प्रकृति तथा अन्य आवश्यक वैधानिक दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।
खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड रखना हो अनिवार्य
उन्होंने सुझाव दिया कि कबाड़ कारोबार में खरीदे जाने वाले महत्वपूर्ण एवं पहचान योग्य स्क्रैप का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाए।
रिकॉर्ड में आवश्यकता के अनुसार—
– विक्रेता का नाम एवं मोबाइल नंबर,
– पहचान संबंधी विवरण,
– सामान का प्रकार,
– अनुमानित मात्रा/वजन,
– खरीद की तारीख,
– भुगतान का माध्यम,
– वाहन का विवरण
जैसी जानकारी दर्ज की जा सकती है।
जहां संभव हो, इस रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने पर चोरी के मामलों की जांच के दौरान संदिग्ध सामान की खरीद-बिक्री की कड़ी को ट्रेस करने में पुलिस को मदद मिल सकती है।
संदिग्ध सामग्री की खरीद पर स्पष्ट दिशा-निर्देश हों
उदय चौधरी ने कहा कि सरकारी संपत्ति, विद्युत सामग्री, रेलवे अथवा SECL से संबंधित सामग्री, निर्माणाधीन स्थलों की सामग्री, सड़क सुरक्षा उपकरण, लोहे की ग्रिल, भारी केबल अथवा अन्य ऐसी सामग्री जिसकी चोरी की संभावना अधिक रहती है, उनकी खरीद को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य वैध व्यवसायियों को परेशान करना नहीं, बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में चोरी की सामग्री को बाजार में खपाने की संभावना को कम करना होना चाहिए।
देर रात होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी
उदय चौधरी ने देर रात होने वाली संदिग्ध कबाड़ लोडिंग-अनलोडिंग की कानून के अनुरूप आकस्मिक जांच एवं निगरानी की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी निगरानी का उद्देश्य वैध कारोबार को रोकना नहीं, बल्कि संदिग्ध परिस्थितियों में चोरी की सामग्री के संभावित परिवहन की जांच करना होना चाहिए।
चोरी के मामलों और कबाड़ बाजार के रिकॉर्ड का हो मिलान
उदय चौधरी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि पिछले वर्षों में दर्ज चोरी की घटनाओं तथा कबाड़ बाजार में खरीदे जाने वाले प्रमुख स्क्रैप के प्रकार का तुलनात्मक अध्ययन किया जा सकता है।
यदि किसी विशेष प्रकार की सामग्री की चोरी और उसी प्रकार के स्क्रैप की खरीद-बिक्री के बीच कोई असामान्य समानता सामने आती है, तो पुलिस उस दिशा में लक्षित जांच कर सकती है।
पुलिस मिलीभगत के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
उदय चौधरी ने कहा कि यदि किसी अवैध कारोबार के संबंध में पुलिस संरक्षण अथवा पुलिसकर्मियों की कथित मिलीभगत के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी आरोप को बिना जांच के सही या गलत मान लेना उचित नहीं है। उपलब्ध दस्तावेजों, तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
वैध कबाड़ी को सम्मान, अवैध कारोबार पर कार्रवाई
उदय चौधरी ने कहा कि समाधान “कबाड़ कारोबार बंद करना” नहीं, बल्कि “कबाड़ कारोबार को व्यवस्थित करना” है।
उन्होंने कहा—
«“जो व्यक्ति वैध तरीके से कबाड़ का व्यवसाय कर रहा है, उसे सम्मानपूर्वक अपना कारोबार करने का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन चोरी का माल बाजार में आसानी से खपने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक महत्वपूर्ण खरीद का रिकॉर्ड हो, संदिग्ध सामग्री की सूचना और जांच की स्पष्ट व्यवस्था हो तथा अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई हो—यही प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।”»
उदय चौधरी ने पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज से मांग की है कि कोरबा सहित बिलासपुर रेंज में कबाड़ दुकानों एवं गोदामों का सत्यापन, आवश्यक पंजीयन/अनुमतियों की जांच, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की व्यवस्था, चोरी के मामलों एवं कबाड़ कारोबार से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी तथा अवैध कबाड़ कारोबार के विरुद्ध समय-समय पर विशेष जांच अभियान चलाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
“चोरी रोकने के लिए चोरी के माल का बाजार रोकना जरूरी”
उदय चौधरी ने कहा कि यदि चोरी किया गया सामान आसानी से बाजार में खप जाता है तो चोरी करने वालों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलता है। इसलिए चोरी रोकने के साथ-साथ चोरी के माल की खरीद-फरोख्त की संभावित कड़ी पर भी प्रभावी निगरानी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, व्यापारी या संस्था को बदनाम करना नहीं है। मांग केवल ऐसी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने की है, जिसमें ईमानदार कबाड़ व्यवसायियों को संरक्षण मिले और चोरी के माल को खपाने वालों के लिए कानून के दायरे में प्रभावी कार्रवाई का रास्ता सुनिश्चित हो।
जारीकर्ता:
उदय चौधरी
सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार
कोरबा, छत्तीसगढ़
























