आखिर किसके ‘आशीर्वाद’ से खुल रही हैं दुकानें?
कोरबा। कोयला अंचल और औद्योगिक नगरी कोरबा से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जिले में कुछ समय पहले तक बंद हो चुकीं अवैध कबाड़ की दुकानें एक बार फिर से धड़ल्ले से खुलने लगी हैं। शहर के कोने-कोने में कबाड़खानों के शटर दोबारा उठने लगे हैं, जिसने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
कप्तान साहब को भनक तक नहीं, फिर कौन है ‘मास्टरमाइंड’?
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिले के कप्तान साहब (पुलिस अधीक्षक) को इस बात की भनक तक नहीं है। एक तरफ जहां पुलिस विभाग अपराध मुक्त कोरबा का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ कप्तान की नाक के नीचे कबाड़ माफिया फिर से पैर पसार रहे हैं।
अब जनता के बीच यह सवाल तेजी से गूंज रहा है:
आखिर किसके आदेश या गुप्त समझौते के तहत ये दुकानें दोबारा खोली जा रही हैं?
क्या खाकी के कुछ ‘खास’ कारिंदों का इस अवैध कारोबार को मूक समर्थन प्राप्त है?
कप्तान साहब की सख्ती के बावजूद उनके मातहत इस कदर बेखौफ कैसे हैं?
⚠️ चोरी और अपराध बढ़ने की आशंका
जानकारों की मानें तो कबाड़ की दुकानें केवल लोहे-प्लास्टिक का व्यापार नहीं करतीं, बल्कि ये शहर में होने वाली चोरियों के माल को खपाने का सबसे सुरक्षित अड्डा होती हैं। इन दुकानों के दोबारा खुलने से जिले में चोरी, कबाड़ की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भारी उछाल आने की आशंका पैदा हो गई है।
बड़ा सवाल: देखना अब यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिले के कप्तान साहब इन ‘महानुभावों’ पर क्या कड़ा एक्शन लेते हैं, या फिर कबाड़ का यह ‘काला खेल’ ऐसे ही परदे के पीछे से चलता रहेगा



