जांजगीर SN इंडिया News। त्योहारों का मौसम नजदीक आते ही पटाखों का कारोबार जोर पकड़ने लगा है। इसके साथ ही जिले में अवैध पटाखों के भंडारण और बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी बस्तियों तक बिना लाइसेंस पटाखों का बड़ा स्टॉक जमा किए जाने की सूचनाएं सामने आ रही हैं। सवाल यह है कि क्या रिहायशी इलाकों में जमा यह विस्फोटक सामग्री किसी बड़े हादसे का कारण बनने के बाद ही प्रशासन की नींद तोड़ेगी?
जांजगीर के आसपास स्थित ग्राम बोड़सरा, खोखसा, कन्हईबंद, मुड़पार, कापन, जर्वे, सरखों, खोखरा और पेंड्री सहित अनेक गांवों में पटाखों के अवैध भंडारण की चर्चाएं हैं। इसी तरह चांपा क्षेत्र के सिवनी, कोसमंदा, महुदा और कुरदा जैसे गांवों में भी बड़े पैमाने पर पटाखे जमा होने की सूचनाएं मिलने की बात कही जा रही है। वहीं जांजगीर-नैला, चांपा और अकलतरा शहर की घनी बस्तियों में भी कुछ व्यापारियों द्वारा बिना आवश्यक लाइसेंस के लाखों रुपये के पटाखे जमा किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
इन सूचनाओं की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि पटाखों का भंडारण सामान्य व्यापारिक सामान रखने जैसा नहीं है। निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत, आबादी के बीच बड़ी मात्रा में आतिशबाजी सामग्री जमा होने से आग लगने की स्थिति में जान-माल का भारी नुकसान हो सकता है। संकरी गलियों, आसपास बने मकानों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी आशंका और भी गंभीर हो जाती है।
पिछले साल भी पकड़ा गया था पटाखों का जखीरा
जिले में अवैध पटाखों के भंडारण का मामला नया नहीं है। पिछले वर्ष ग्राम कापन, मुड़पार सहित कई गांवों में पटाखों का जखीरा पकड़े जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसके बावजूद यदि इस वर्ष भी अलग-अलग इलाकों में अवैध भंडारण की शिकायतें मिल रही हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पिछली कार्रवाइयों के बाद निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।
हाल ही में ग्राम बैजलपुर स्थित महामाया क्रेशर के एक खाली मकान में पटाखों का अवैध भंडारण कर बिक्री किए जाने की सूचना पर बलौदा पुलिस ने दबिश दी। कार्रवाई के दौरान अलग-अलग कार्टूनों में रखे विभिन्न प्रकार के पटाखे बरामद किए गए, जिनकी कीमत लगभग 8 लाख 56 हजार रुपये बताई गई। इस कार्रवाई ने जिले में पटाखों के भंडारण और बिक्री की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर ध्यान खींचा है।
कार्रवाई कुछ ठिकानों तक सीमित या पूरे जिले में होगी जांच?
बैजलपुर में लाखों रुपये के पटाखे बरामद होने के बाद अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या जांच केवल सामने आए एक ठिकाने तक सीमित रहेगी या जिले के अन्य संदिग्ध भंडारण स्थलों की भी पड़ताल की जाएगी? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए केवल छिटपुट दबिश पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के मद्देनजर जांजगीर-नैला, चांपा और अकलतरा के घनी आबादी वाले इलाकों के साथ आसपास के गांवों में भी जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि, जिन स्थानों पर अवैध भंडारण की बात कही जा रही है, वहां वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभागों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसे से पहले जागेगा प्रशासन?
त्योहारों के दौरान पटाखों की मांग बढ़ने के कारण भंडारण और बिक्री पर निगरानी बेहद जरूरी हो जाती है। ऐसे में पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे लाइसेंस, भंडारण स्थल, सुरक्षा मानकों और बिक्री की वैधता की जांच करें। संदिग्ध स्थानों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आबादी के बीच असुरक्षित तरीके से पटाखे जमा न किए जाएं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पिछले वर्ष भी कई स्थानों पर पटाखों का जखीरा पकड़ा गया था और इस वर्ष बैजलपुर में 8.56 लाख रुपये के पटाखे बरामद हुए हैं, तो क्या इस बार जिलेभर में व्यापक जांच अभियान चलाया जाएगा? या फिर कार्रवाई कुछ ठिकानों तक सीमित रह जाएगी और बाकी स्थानों पर अवैध कारोबार त्योहार तक जारी रहेगा?
फिलहाल, जिले में पटाखों के अवैध भंडारण की शिकायतों की निष्पक्ष जांच और रिहायशी इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। किसी संभावित हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय समय रहते जांच और रोकथाम की कार्रवाई ही प्रशासन की वास्तविक परीक्षा होगी।


