कोरबा:
जिले में एक बार फिर कबाड़ माफिया के पर फैलाने की सुगबुगाहट से हड़कंप मच गया है। सूत्रों से मिली पक्की खबर के अनुसार, कबाड़ कारोबारियों की हाल ही में एक गुप्त मीटिंग संपन्न हुई है, जिसमें ‘लंबे काम’ को दोबारा शुरू करने का ताना-बाना बुना गया है। इस बैठक के सामने आने के बाद यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या कोरबा में एक बार फिर किसी बड़े पुल या सरकारी संपत्ति पर कटर चलने वाला है?

’हर दुकान के पीछे आदमी’ — कबाड़ माफिया का नया फंडा
सूत्रों का दावा है कि इस बार पुलिस और प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक नया ‘सिस्टम’ तैयार किया गया है। निचले स्तर के कुछ अधिकारियों से कथित साठगांठ के बाद माफिया ने योजना बनाई है कि हर कबाड़ दुकान के पीछे अपने खास आदमियों को तैनात किया जाएगा, ताकि किसी भी कार्रवाई या रेड की भनक लगते ही मामला दबाया जा सके और माल पार कर दिया जाए।
प्रशासन के सामने सीधी चुनौती
जब जिले में कबाड़ का काला कारोबार दोबारा पांव पसार रहा है, तो सवाल उठता है कि प्रशासनिक अमला और जिम्मेदार अधिकारी खामोश क्यों हैं?
क्या जिले के कप्तान साहब(SP) को इस गोरखधंधे की भनक नहीं है
क्या निचले अमले की लापरवाही या शह के कारण माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं?
क्या फिर से किसी बड़े सरकारी ढांचे या पुल के कटने का इंतजार किया जा रहा है?
बड़ा सवाल: जब शहर में कबाड़ का अवैध काम शुरू होने की खबरें जगजाहिर हैं, तो फिर जमीनी स्तर पर सख्त कार्रवाई क्यों नजर नहीं आ रही?
अब हरकत में आना होगा प्रशासन को!
कोरबा पुलिस और जिला प्रशासन के लिए यह सीधे तौर पर एक खुली चुनौती है। अगर समय रहते कबाड़ दुकानों, उनके पीछे बने गोदामों और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी नहीं की गई, तो जिले में अपराध का यह जाल और गहरा हो जाएगा।
जनता और मीडिया की नजर अब जिले के आला अधिकारियों पर टिकी है—क्या वे माफिया के इस ‘नए फंडे’ को ध्वस्त करेंगे या कबाड़ का यह काला कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा?


























