कोरबा/पाली:- “स्कूल आ पढ़े बर, जिनगी ला गढ़े बर” जैसे ध्येय वाक्य को लेकर राज्य सरकार शिक्षा के प्रति करोड़ो रूपये खर्च कर रही है, हर एक- दो किलोमीटर के अंदर प्राथमिक शाला खोली जा रही है, हर प्राथमिक शाला का मिडिल स्कूल के रूप में उन्नयन किया जा रहा है और नए- नए भवनों का निर्माण कराकर शिक्षा के स्तर को बढाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर नजर डालें तो रंगोले व नर्सरीपारा का माध्यमिक और प्राथमिक शाला भवन की तस्वीर देखकर उक्त व्यवस्था पर खाली ढकोसले ही नजर आते हैं।
ये तस्वीर है पाली खण्ड शिक्षा कार्यालय अंतर्गत और ब्लाक मुख्यालय से महज 3 किमी. की दूरी पर स्थित माध्यमिक शाला रंगोले और प्राथमिक शाला नर्सरीपारा की। दोनों विद्यालय एक ही परिसर में संचालित हैं तथा मा.शा. में 64 और प्रा.शा. में 29 कुल 93 बच्चें यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गत 2005- 06 में निर्मित उक्त दोनों शाला भवनों के दयनीय जर्जर हालत की जो तस्वीरें ग्रामीणों ने उपलब्ध कराई हैं, उनमें उपेक्षा और बदहाली साफ दिख रही है तथा जो सरकारी स्कूल भवन की सुविधाओं के दावों पर कई सवाल खड़े कर रही है। बात करें प्राथमिक शाला भवन की तो सभी कमरों के छत का प्लास्टर पूरी तरह उखड़ चुका है और लोहे की जाली बाहर निकल आई है। दीवारों पर गहरी दरारें और कमरों में सीलन के साथ पानी भरा हुआ है। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए शिक्षकों ने दो वर्ष पहले भवन में ताला जड़ दिया और प्राथमिक के 29 बच्चों को 2010 में बने अतिरिक्त कक्ष में बैठाया जा रहा है, जहां कक्षा 1 से 5 तक एक ही कमरे में पढ़ाई होती है और वह कक्ष भी अब जर्जर होने लगा है। वहीं माध्यमिक शाला की बात करें तो क्लास के अंदर छतों से लगातार प्लास्टर गिर रहे हैं, यहां भी दीवारों पर बड़ी- बड़ी दरारें उभर आई हैं, फर्श उखड़ गए हैं और छतें- दीवारें सभी जगह सीलन है। इस भवन के हालात के कारण माध्यमिक के बच्चों की पढ़ाई बाहर शेड में कराई जा रही है। अब सवाल सिर्फ स्कूल की बदहाल भवनों का नही, बल्कि उन बच्चों की सुरक्षा का है, जो मजबूरी में इसी सरकारी व्यवस्था के भरोसे पढ़ रहे हैं और उनके अभिभावकों के लिए यही स्कूल ही शिक्षा का सबसे बड़ा सहारा है। ग्रामीणों के अनुसार दोनों जर्जर भवनें की हालत बारिश आते ही और खराब हो जाती हैं। जहां पानी कमरों के भीतर फर्श पर भर जाता है और बच्चों को पढ़ाई में परेशानी होती है। पुराने जर्जर भवन की दयनीय हालत को देखते हुए उनके मन मे भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है और उन्होंने शिक्षा विभाग से कई बार फरियाद लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा।
सरपंच के लिखित मांग पर भी नतीजा शून्य
ग्राम के सरपंच संतोष मेश्राम ने भी बच्चों की सुरक्षा का हवाला देते हुए कलेक्टर जनदर्शन में पहुँचकर नए प्राथमिक, माध्यमिक शाला भवन निर्माण के लिए मांग की। यहां तक कि ग्राम डोंगानाला में गत आयोजित सुशासन तिहार में बतौर मुख्य अतिथि शामिल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव को भी आवेदन सौंपा, लेकिन दुर्भाग्य है कि इतने प्रयासों के बाद भी रंगोले का माध्यमिक शाला और नर्सरीपारा का प्राथमिक शाला आज भी अपनी उसी उपेक्षा और बदहाली को लेकर आंसू बहा रहा है।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीणों द्वारा नए प्राथमिक- माध्यमिक स्कूल भवन की अविलंब मांग
शासन- प्रशासन की अनदेखी को लेकर ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है और उनका कहना है कि 93 बच्चें मौत के साये में भविष्य गढ़ रहे हैं, जर्जर भवन को लेकर यदि कभी कोई घटना घटित हो गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ग्रामवासियों ने बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से अविलंब नए प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला भवन निर्माण की मांग की हैं। ऐसे में स्कूल की स्थिति को लेकर शासन- प्रशासन को भी अब फाइलों की नही, ईंट- सीमेंट की जरूरत है, ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके। हादसे का इंतजार करना बच्चों के साथ सबसे बड़ा अपराध होगा।



























