कोरबा। ऊर्जाधानी कोरबा के चंद्रनगर क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और प्रशासनिक लापरवाही का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कोयला खदानों से निकलने वाले भारी-भरकम मलबे और पत्थर युक्त मिट्टी (OB) के निपटारे को लेकर नीलकंठ कंपनी के कामकाज पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कंपनी द्वारा सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस कार्य से स्थानीय क्षेत्र में भारी आक्रोश है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं
नियमों को रौंदकर हो रहा OB का निपटारा, आखिर शह किसकी
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चंद्रनगर क्षेत्र में नीलकंठ कंपनी द्वारा ओबी (OB) डंपिंग में सुरक्षा और पर्यावरण के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पत्थर युक्त मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने के बजाय इसे बेतरतीब ढंग से डंप किया जा रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
क्षेत्र के नागरिकों का पूछना है कि:
आखिर किसके संरक्षण में नीलकंठ कंपनी इतनी बड़ी लापरवाही को अंजाम दे रही है?
स्थानीय माइनिंग अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन के बीच ऐसा क्या ‘तालमेल’ है कि खुलेआम चल रहे इस खेल पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही?
क्या विभाग किसी बड़े हादसे या जनहानि का इंतजार कर रहा है
माइनिंग GM की भूमिका पर उठे सवाल कार्रवाई क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में नीलकंठ कंपनी के माइनिंग जनरल मैनेजर (GM) की भूमिका सबसे ज्यादा संदेहास्पद नजर आ रही है। खदान संचालन और ओबी डंपिंग की पूरी जिम्मेदारी माइनिंग जीएम और उनकी टीम की होती है। चंद्रनगर के सजग नागरिकों का कहना है कि ऐसा हो ही नहीं सकता कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ी की भनक जीएम को न हो।
बड़ा सवाल: यदि माइनिंग GM को इस बात की जानकारी है, तो उन्होंने अब तक कंपनी के इस तानाशाही रवैए पर रोक क्यों नहीं लगाई? क्या यह मौन सहमति किसी बड़ी ‘मिलीभगत’ की ओर इशारा करती है?
तुरंत एक्शन न हुआ तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
चंद्रनगर क्षेत्र के प्रभावितों और स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है। धूल के गुबार, भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही और मलबे के ढहने के खतरे के बीच लोग जीने को मजबूर हैं। स्थानीय प्रबुद्ध जनों का कहना है कि अगर इस खबर के प्रकाशन के बाद भी नीलकंठ कंपनी के माइनिंग जीएम ने तुरंत संज्ञान नहीं लिया और मौके पर डंपिंग कार्य को दुरुस्त कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला केवल खबरों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में कंपनी के खिलाफ उग्र आंदोलन और चक्काजाम की रणनीति बनाई जा रही है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
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