Pradeep Rao ki रिपोर्ट
कोरबा, छत्तीसगढ़। कुसमुंडा खदान के गेट नंबर–1 के आसपास खुलेआम कथित रूप से गांजा बिक्री होने को लेकर स्थानीय लोग गहरी नाराज़गी जता रहे हैं। इलाके के कई निवासियों का आरोप है कि “दिनेश अग्रवाल” और “कालीचरण” नाम के दो व्यक्तियों द्वारा यह अवैध कारोबार लंबे समय से चलाया जा रहा है, लेकिन प्रशासन और आबकारी विभाग की चुप्पी ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों क कहना हैं—‘सभी की नज़र के सामने कारोबार, पर कार्रवाई शून्य’
रोज़मर्रा खदान क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों, स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि अवैध नशे का यह धंधा खुलेआम चलता है।
एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“यह कोई छुपी हुई बात नहीं है। लंबे समय से लोग देखते आ रहे हैं कि किन लोगों के पास क्या गतिविधि चलती है, पर कोई रोक-टोक नहीं होती।”
लोगों के अनुसार, यह अवैध नशा कारोबार न सिर्फ युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रहा है, बल्कि खदान क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर भी असर डाल रहा है।
आबकारी विभाग पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के आरोप यहीं तक सीमित नहीं हैं। कई नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि आबकारी विभाग के कुछ कर्मियों की “मौन भूमिका” और कथित घूसखोरी के कारण ही यह कारोबार बेधड़क चलता आ रहा है।
जिम्मेदार अधिकारी क्यों चुप?
क्षेत्र के सामाजिक संगठनों का कहना है कि वह जल्द ही जिला कलेक्टर, एसपी और प्रशासनिक अधिकारियों से सामूहिक रूप से मिलकर लिखित शिकायत देंगे।
उनका कहना है:
“अगर गेट नंबर–1 जैसे व्यस्त जगह पर खुलेआम नशा बिक रहा है, तो यह सिर्फ कानून की कमजोरी नहीं, बल्कि अधिकारियों की उदासीनता का भी बड़ा संकेत है।”
अवैध नशे की उपलब्धता से स्कूली और कॉलेज-going युवाओं पर खतरा बढ़ा है। कुछ अभिभावकों ने बताया कि इलाके में नशे का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए नियमित रेड, गुप्त निगरानी, और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ज़रूरी है।






