*कोरबा।* छत्तीसगढ़ दिव्यांग शासकीय अधिकारी/कर्मचारी संघ, जिला कोरबा ने स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ दिव्यांग महिला कर्मचारी श्रीमती ज्योति खाकसे के वर्ष 2019 से लंबित स्थानांतरण प्रकरण तथा माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पारित आदेश का पालन नहीं किए जाने को लेकर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कोरबा द्वारा प्रकरण में निष्पक्ष पुनर्विचार कर नियमानुसार न्यायसंगत निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संघ संबंधित दिव्यांग महिला कर्मचारी को न्याय दिलाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर की शरण लेने के लिए बाध्य होगा।
संघ के जिला अध्यक्ष प्रकाश खाकसे ने बताया कि श्रीमती ज्योति खाकसे स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत दिव्यांग महिला कर्मचारी हैं। उनके द्वारा वर्ष 2019 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानी धनराज कुंवर, कोरबा से जिला चिकित्सालय, कोरबा में स्थानांतरण किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया है। लंबे समय से आवेदन लंबित होने के कारण उन्हें अपनी दिव्यांगता, स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों, आवागमन की कठिनाइयों एवं कार्यस्थल से संबंधित अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
*1. माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायिक सिद्धांतों की अनदेखी*
संघ ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नेतराम यादव विरुद्ध स्टेट ऑफ राजस्थान, (2022) 15 SCC 81 में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धांतों का परीक्षण कर संबंधित प्रकरण में लागू निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा दिनांक 07.08.2019 को पारित आदेश एवं संबंधित न्यायिक निर्देशों का भी परीक्षण किया जाना चाहिए। दिव्यांग कर्मचारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापना संबंधी निर्णय लेते समय उनकी शारीरिक स्थिति, आवागमन की कठिनाइयों, कार्यस्थल की उपलब्धता तथा आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखना न्यायसंगत है।
*2. माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के आदेश का पालन नहीं*
माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर द्वारा प्रकरण क्रमांक 03/2026 में दिनांक 06.08.2026 को आदेश पारित किया गया है। उक्त आदेश में शिकायतकर्ता दिव्यांग महिला कर्मचारी के प्रकरण पर पुनर्विचार करते हुए उनकी दिव्यांगता, स्वास्थ्य स्थिति, पारिवारिक परिस्थितियों, आवागमन एवं कार्यस्थल की उपलब्धता तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत युक्तियुक्त सुविधा (Reasonable Accommodation) के सिद्धांतों के अनुरूप कारणयुक्त निर्णय लेने की अनुशंसा की गई है।
साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन 60 दिवस के भीतर राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय को प्रेषित करने तथा उसकी सूचना शिकायतकर्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
संघ का कहना है कि निर्धारित अवधि व्यतीत होने के बाद भी यदि आदेश के अनुरूप कार्रवाई की जानकारी संबंधित कर्मचारी को उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है।
*3. राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के आदेश की प्रति प्राप्त नहीं होने का हवाला*
संघ के प्रतिनिधियों द्वारा कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा में संपर्क कर आदेश के पालन के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई। इस दौरान संबंधित कार्यालय द्वारा यह बताया गया कि उन्हें माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा पारित आदेश की प्रति प्राप्त नहीं हुई है।
संघ ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एक ओर राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा सुनवाई कर आदेश पारित किया जाता है तथा संबंधित विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर संबंधित कार्यालय द्वारा आदेश की प्रति प्राप्त नहीं होने का हवाला दिया जाता है। ऐसी स्थिति में आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर उसका तत्काल पालन सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
*4. वर्ष 2019 से लंबित स्थानांतरण आवेदन पर पुनर्विचार की मांग*
श्रीमती ज्योति खाकसे का वर्ष 2019 से लंबित स्थानांतरण आवेदन केवल सामान्य प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर निराकृत नहीं किया जाना चाहिए। उनकी वास्तविक दिव्यांगता, स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों, आवागमन की समस्याओं, पारिवारिक परिस्थितियों, उपलब्ध स्वीकृत पदों एवं विभागीय आवश्यकता का समुचित परीक्षण किया जाना आवश्यक है।
संघ की मांग है कि उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानी धनराज कुंवर, कोरबा से जिला चिकित्सालय, कोरबा में स्थानांतरित करने के संबंध में उपलब्ध पदों एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता से नियमानुसार निर्णय लिया जाए।
*5. श्री जय सिंह की प्रथम नियुक्ति एवं पदस्थापना अभिलेखों की जांच की मांग*
संघ ने फार्मासिस्ट ग्रेड-2 श्री जय सिंह की प्रथम नियुक्ति, नियुक्ति प्राधिकारी, नियुक्ति दिनांक, मूल पदस्थापना, वर्तमान पदस्थापना तथा कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा में पदस्थापना अथवा संलग्नीकरण से संबंधित आदेशों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
इसके अंतर्गत निम्नलिखित अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है—
1. श्री जय सिंह, फार्मासिस्ट ग्रेड-2 का प्रथम नियुक्ति आदेश।
2. उनकी मूल पदस्थापना एवं वर्तमान पदस्थापना का आदेश।
3. कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा में पदस्थापना अथवा संलग्नीकरण संबंधी आदेश।
4. संबंधित कार्यालय के फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के स्वीकृत, कार्यरत एवं रिक्त पदों की जानकारी।
5. संबंधित अवधि के पदस्थापना एवं वेतन आहरण संबंधी अभिलेख।
6. शासकीय आवास आवंटन संबंधी आदेश एवं पात्रता अभिलेख, यदि आवंटन किया गया हो।
*6. अन्य फार्मासिस्ट कर्मचारियों की पदस्थापना एवं संलग्नीकरण की जांच*
संघ के संज्ञान में आया है कि जिला चिकित्सालय, कोरबा में श्री मुकेश कुमार प्रजापति सहित अन्य फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मचारियों से संलग्नीकरण के आधार पर कार्य कराया जा रहा है।
जबकि संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने के संबंध में जारी आदेशों का पालन किया जाना आवश्यक है।
अतः जिला चिकित्सालय, कोरबा में कार्यरत समस्त फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मचारियों की वास्तविक पदस्थापना, स्वीकृत पद, कार्यरत पद एवं संलग्नीकरण की स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
*7. संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए*
संघ की मांग है कि संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने के संबंध में जारी आदेशों का पालन करते हुए जिला चिकित्सालय, कोरबा में संलग्नीकरण के आधार पर कार्य कर रहे समस्त फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए तथा उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने की नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
साथ ही जिला चिकित्सालय में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के स्वीकृत पदों, नियमित पदस्थापना एवं रिक्त पदों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके पश्चात दिव्यांग महिला कर्मचारी श्रीमती ज्योति खाकसे के स्थानांतरण आवेदन पर प्राथमिकता से विचार किया जाए।
*8. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अंतर्गत युक्तियुक्त सुविधा प्रदान करने की मांग*
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 में सरकारी रोजगार के क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों के साथ भेदभाव नहीं करने तथा आवश्यकतानुसार युक्तियुक्त सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के आदेश में भी शिकायतकर्ता की दिव्यांगता एवं कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाओं की आवश्यकता पर विचार करने की बात कही गई है।
ऐसी स्थिति में श्रीमती ज्योति खाकसे के प्रकरण में उनकी वास्तविक कठिनाइयों एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर केवल सामान्य प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेना न्यायोचित नहीं होगा।
संघ की प्रमुख मांगें
छत्तीसगढ़ दिव्यांग शासकीय अधिकारी/कर्मचारी संघ, जिला कोरबा की ओर से संबंधित अधिकारियों से निम्नलिखित मांगें की गई हैं—
1. माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रकरण क्रमांक 03/2026 में दिनांक 06.08.2026 को पारित आदेश का तत्काल नियमानुसार पालन सुनिश्चित किया जाए।
2. श्रीमती ज्योति खाकसे, फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के वर्ष 2019 से लंबित स्थानांतरण आवेदन पर पुनर्विचार कर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रानी धनराज कुंवर, कोरबा से जिला चिकित्सालय, कोरबा में स्थानांतरित करने के संबंध में उपलब्ध पद, विभागीय आवश्यकता, दिव्यांगता एवं स्वास्थ्य संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कारणयुक्त निर्णय लिया जाए।
3. कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा में फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के स्वीकृत पदों, कार्यरत कर्मचारियों, रिक्त पदों एवं संलग्नीकरण की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
4. श्री जय सिंह, फार्मासिस्ट ग्रेड-2 की प्रथम नियुक्ति, मूल पदस्थापना, वर्तमान पदस्थापना एवं संलग्नीकरण संबंधी आदेशों की जांच कर प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
5. श्री मुकेश कुमार प्रजापति, फार्मासिस्ट ग्रेड-2 के जिला चिकित्सालय, कोरबा में संलग्नीकरण एवं संबंधित पद की स्वीकृति के संबंध में अभिलेखों का परीक्षण कराया जाए।
6. श्रीमती तृप्ति देवांगन के स्थानांतरण एवं अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना/संलग्नीकरण की परिस्थितियों का भी निष्पक्ष परीक्षण कर समानता एवं प्रशासनिक पारदर्शिता के आधार पर निर्णय लिया जाए।
7. जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
8. माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय, रायपुर से प्रकरण क्रमांक 03/2026 में दिनांक 06.08.2026 को पारित आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा को तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
9. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा द्वारा आदेश की प्रति प्राप्त नहीं होने की स्थिति में अब तक की गई कार्रवाई तथा आदेश के पालन में हुए विलंब के लिए जिम्मेदारी स्पष्ट की जाए।
10. संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संलग्नीकरण समाप्त करने के संबंध में जारी आदेशों का पालन करते हुए जिला चिकित्सालय, कोरबा में संलग्न समस्त फार्मासिस्ट ग्रेड-2 कर्मचारियों का संलग्नीकरण नियमानुसार समाप्त कर उन्हें मूल पदस्थापना स्थल पर भेजा जाए तथा पालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया जाए।
11. माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के आदेश के पालन में की गई समस्त कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार राज्य आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय, रायपुर को भेजा जाए तथा उसकी प्रति शिकायतकर्ता एवं संघ को उपलब्ध कराई जाए।
12. इस शिकायत पर की गई समस्त कार्रवाई से छत्तीसगढ़ दिव्यांग शासकीय अधिकारी/कर्मचारी संघ, जिला कोरबा को लिखित रूप में अवगत कराया जाए।
## न्याय नहीं मिला तो उच्च न्यायालय जाएगा संघ
संघ के जिला अध्यक्ष प्रकाश खाकसे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दिव्यांग महिला कर्मचारी श्रीमती ज्योति खाकसे को न्याय दिलाना संघ की प्राथमिक जिम्मेदारी है। माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन द्वारा सुनवाई के पश्चात आदेश पारित किए जाने के बावजूद यदि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आदेश का पालन नहीं किया जाता तथा उनके वर्ष 2019 से लंबित स्थानांतरण आवेदन पर न्यायसंगत पुनर्विचार नहीं किया जाता है, तो संघ चुप बैठने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा को इस प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए। यदि विभाग द्वारा उचित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो संघ पीड़ित दिव्यांग महिला कर्मचारी को न्याय दिलाने के लिए माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर में याचिका प्रस्तुत करने सहित उचित न्यायिक कार्रवाई करेगा।
*यदि इस प्रकरण में संघ को माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होना पड़ता है, तो इसके लिए उत्पन्न परिस्थितियों की संपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग एवं संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।*
संघ ने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि दिव्यांग महिला कर्मचारी के सम्मान, अधिकार, समान अवसर एवं न्याय की लड़ाई है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की मूल भावना के अनुरूप दिव्यांग कर्मचारियों को भेदभाव से मुक्त वातावरण एवं आवश्यक युक्तियुक्त सुविधाएं प्रदान करना शासन एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अंत में संघ ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए, माननीय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा दिव्यांग महिला कर्मचारी को शीघ्र न्याय प्रदान किया जाए।
*जारीकर्ता:*
*प्रकाश खाकसे*
जिला अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ दिव्यांग शासकीय अधिकारी/कर्मचारी संघ
जिला – कोरबा, छत्तीसगढ़







