कोरबा जिले की राताखार नदी में अवैध रेत खनन बीते महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है। क्षेत्रीय निवासियों का कहना है कि यहाँ प्रतिदिन 100 से अधिक वाहनों के माध्यम से नदी से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। ग्रामीणों ने कई बार खुद रोकने की कोशिश की और प्रशासन को शिकायत भी दी, लेकिन न तो खनन रुका और न ही किसी ठोस कार्रवाई के संकेत मिले।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कारोबार को कुछ प्रभावशाली लोगों और प्रशासनिक संरक्षण के भरोसे खुलेआम चलाया जा रहा है, जिसके कारण कानून की खुलेआम अनदेखी हो रही है।
प्रदेश में अवैध रेत खनन: बढ़ती समस्या का व्यापक असर
राताखार नदी का यह मामला छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन की व्यापक समस्या को उजागर करता है। पिछले कुछ महीनों में कई जिलों से ऐसे ही मामले सामने आए हैं—
- प्रतापगढ़: एनजीटी प्रतिबंध के बावजूद मांड नदी में रात के समय अवैध रेत निकासी जारी।
- जांजगीर-चांपा: हसदेव और महानदी में बड़ी मशीनों से खनन की शिकायतें लगातार मिल रहीं।
- भाटापारा: महानदी और शिवनाथ नदी में अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हेतु एफआईआर दर्ज करने के विशेष निर्देश जारी।
इन घटनाओं से साफ है कि प्रदेश में अवैध खनन माफिया बेखौफ है और स्थानीय प्रशासन कई जगह असहाय या उदासीन दिखाई देता है।
सरकार का दावा : नए नियम और कड़ा रुख
अवैध रेत खनन पर लगाम लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2025 में ‘छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम-2025’ लागू किया था। इसके मुख्य प्रावधान शामिल हैं—
- ई-नीलामी प्रणाली: खदान आवंटन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन, ताकि पारदर्शिता बढ़े।
- राजस्व संरक्षण: रेत की निर्धारित मात्रा के आधार पर पूर्व-रॉयल्टी जमा कराने की अनिवार्यता।
- कार्रवाई का दावा: सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024–25 से जून 2025 तक अवैध खनन के 6,331 मामले दर्ज किए गए और 184 मशीनें जब्त की गईं।
हालाँकि, राताखार नदी का मौजूदा मामला इन दावों और नियमों की वास्तविक प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
प्रशासन की प्रतिक्रियाएँ: कुछ जिलों में कार्रवाई, कोरबा में शिथिलता?
कुछ जिलों में प्रशासन ने समय-समय पर कार्रवाई भी की है—
- महासमुंद: संयुक्त टीम ने अवैध खनन में लगी चार नावें जब्त कीं।
- भाटापारा कलेक्टर: अवैध खनन की सूचना के लिए मोबाइल नंबर 92018-99925 जारी किया, सटीक सूचना देने वालों को पुरस्कार देने की घोषणा।
लेकिन कोरबा जिले में राताखार नदी के मामले पर अब तक प्रशासनिक चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
आगे की राह : जनता में बढ़ी नाराजगी, पर्यावरणीय खतरा गहरा
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से नदी में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, लगातार दोहन से पर्यावरणीय असंतुलन भी गहरा रहा है।
स्थानीय नागरिक प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि अवैध खनन पर अंकुश लगे और नदी तथा गांवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



