ग्राउंड रिपोर्ट / विशेष कवरेज
ग्राम पंचायत बेला जिला कोरबा
[पुरुषोत्तम साहू संवाददाता]
बालको से लगे ग्राम बेला सहीत सभी ग्राम पंचायतों में जल जिवन मिशन की यही इस्तिथी ग्रामीण भारत के हर घर तक साफ पीने का पानी पहुंचाने के मकसद से शुरू की गई केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशन’ (हर घर जल) धरातल पर आकर कुप्रबंधन, लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। जिस पानी की टंकी को ग्रामीणों की प्यास बुझानी थी, वह आज गांव के बीचों-बीच एक ‘सफेद हाथी’ बनकर खड़ी है—नाकाम दावों और बदहाली का प्रतीक।
कागजों में ‘हर घर जल’, हकीकत में ‘सूखा नल’
गांव के मुख्य चौराहे पर बनी विशालकाय पानी की टंकी दूर से ही चमकती है, लेकिन इसके नीचे बने नलों से पानी की एक बूंद तक नहीं टपकती। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदारों ने टंकी का ढांचा तो खड़ा कर दिया और सड़कों को खोदकर पाइपलाइनें भी बिछा दीं, लेकिन योजना के शुरू होने के महीनों/सालों बाद भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना हैं की

”टंकी बने सालों बीत गए, गांव भर में गड्ढे खोदकर नल लगा दिए गए। हमें लगा था कि अब दूर-दराज के हैंडपंपों और कुओं से पानी नहीं ढोना पड़ेगा, लेकिन नल सिर्फ दिखावे का शोपीस बनकर रह गए हैं। पानी आज भी वही पुराना, दूषित ही पीना पड़ रहा है।”
तीन बड़ी खामियां, जिन्होंने योजना को बनाया ‘सफेद हाथी’
गुणवत्ताहीन निर्माण और लापरवाही: ठेकेदारों द्वारा पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों को बिना मरम्मत के छोड़ दिया गया, जिससे गांव में जलभराव और हादसों का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों पर घटिया सामग्री के कारण पाइपलाइनों में टेस्टिंग के दौरान ही लीक आ गई।
जल स्रोत का अभाव टंकी और पाइपलाइन का ढांचा तो तैयार कर दिया लेकिन आज तक जल की एक बुंद तक किसी के घर नहीं पहुंचा
जिसमें अधिकारी और ठेकेदार की मिली भगत से यह गोलमोल कार्य कराया गया आज देखा जाए तो सभी ग्राम पंचायत में शहरी क्षेत्र में जल जीवन मिशन का कनेक्शन बिछाया गया बड़े-बड़े सफेद हाथी बनाए गए लेकिन आज तक किसी के घर भी जल जीवन मिशन का लाभ नहीं पहुंचा लेकिन लाभ उन्हें अवश्य प्राप्त हुआ जो इस कार्य को अंजाम देने की बीड़ा उठाकर बैठे थे




