S N india news कोरबा-बांकीमोंगरा। जिले के बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक निजी अस्पताल में रविवार को इलाज के दौरान एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका गंगा बाई (निवासी- ज़मनीमुड़ा) है। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार गंगा बाई की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उसे तत्काल इलाज के लिए बांकीमोंगरा स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह अस्पताल सरकारी डॉक्टर डी.सी. पंत द्वारा संचालित किया जाता है। इलाज के दौरान महिला की हालत और बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया।
चटाईनार के सरकारी अस्पताल में पदस्थ व निजी अस्पताल के संचालक डॉ. डी.सी. पंत का कहना है कि महिला पहले से ही गंभीर बीमार थी और बेहद नाजुक हालत में अस्पताल लाई गई थी। डॉक्टर का दावा है कि अस्पताल की ओर से हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी।
परिजनों के आरोप और आक्रोश
दूसरी ओर मृतका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर उचित उपचार नहीं दिया और लापरवाही बरती, जिसकी वजह से गंगा बाई की मौत हुई। ग्रामीणों और परिजनों ने यह भी सवाल खड़े किए हैं कि जब डॉ. डी.सी. पंत एक सरकारी डॉक्टर हैं, तो फिर वह निजी अस्पताल कैसे चला रहे हैं?
परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते बेहतर इलाज किया जाता तो गंगा बाई की जान बच सकती थी। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच की मांग की है।
0 पुलिस जांच और प्रशासनिक पहलू
मामले की जानकारी बांकीमोंगरा पुलिस को दी गई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और परिजनों के बयान दर्ज किए गए। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि महिला पहले से बीमार थी, हालांकि अस्पताल प्रबंधन की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इस घटना ने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं, तो मरीजों को निजी अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।
0 सरकारी डॉक्टर पर सवाल
इस घटना ने एक और बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है—क्या सरकारी डॉक्टर बिस्तरों वाले निजी अस्पताल का संचालन कर सकते हैं? इस सवाल पर अब चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि प्रशासन को इस दिशा में भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए




