कोरबा :- जिले में कबाड़ कारोबार पर लगी “पूर्ण प्रतिबंध” की मुहर अब कुछ वैसी लगने लगी है जैसे दुकान के बाहर “Closed” लिखा हो और अंदर से गल्ला चल रहा हो। दिन में सन्नाटा, रात में ट्रक की खड़खड़ाहट—कोरबा में कबाड़ का धंधा अब आधिकारिक तौर पर “नाइट ऑपरेशन” में शिफ्ट हो चुका है।
ताज़ा मामला राताखार का है, जहां बंद पड़े गोदाम से कबाड़ लोड गाड़ियां पकड़ाई हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती… क्योंकि इन गाड़ियों के तार जुड़े बताए जा रहे हैं शहर के चर्चित नाम मुकेश साहू से—और उसी कड़ी में सामने आता है जो कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क का एक्टिव चेहरा बताया जा रहा है।
“अब सवाल ये नहीं कि गाड़ियां पकड़ी गईं”…
सवाल ये है कि जब “बंदी” लागू है, तो फिर ये गाड़ियां चल किसकी “इजाजत” से रही हैं?
स्थानीय लोगों की जुबान पर अब एक ही लाइन चिपक गई है—
“चोर चोरी से जाए, हेराफेरी से नहीं”
और यहां तो लगता है हेराफेरी ने स्थायी एड्रेस ले लिया है।
दिलचस्प बात ये है कि इससे पहले भी मुकेश साहू के नाम से एक कबाड़ लोड गाड़ी करतला थाना में पकड़ी जा चुकी है, कुछ दिन पहले जो अब तक छुड़ाई नहीं जा सकी। लेकिन हैरानी ये कि उस कार्रवाई के बाद भी न तो डर दिखा, न ब्रेक लगा—बल्कि गाड़ियां फिर सड़कों पर दौड़ती नजर आ रही हैं।
कुछ दिन पहले ही राताखार में बुलडोजर कार्रवाई हुई थी। बड़े-बड़े दावे, सख्ती की तस्वीरें, और “अब बर्दाश्त नहीं होगा” जैसे बयान… लेकिन हकीकत ये है कि धंधा फिर भी चालू है और मनोबल पहले से ज्यादा हाई।
कोतवाली थाना ने गाड़ियों के पकड़े जाने की पुष्टि की किसी साहू की गाड़ी है और जांच की बात कही है। मगर जनता अब “जांच” शब्द को भी एक रूटीन अपडेट की तरह लेने लगी है—जिसका अंत अक्सर “कार्रवाई जारी है” पर होता है।
“जनता पूछ रही है”:
क्या ये सिर्फ छोटे खिलाड़ियों पर एक्शन है?
या कभी इस खेल के असली “डायरेक्टर” तक भी कैमरा पहुंचेगा?
फिलहाल कोरबा में कबाड़ का खेल बंद नहीं हुआ है…
बस ओपन से अंडरग्राउंड हो गया है—
और सिस्टम… शायद अब भी “ओवरग्राउंड” होने का इंतजार कर रहा है।



