कोरबा। केंद्र सरकार की अति महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना को छत्तीसगढ़ सरकार और कोरबा कलेक्टर पूरी शिद्दत से अंजाम देने में जुटे हैं। जिला और जनपद पंचायतों की भी निगरानी है, किंतु यहां आलम है कि पंचायत में बैठे लोग जिला स्तर के चंद अधिकारियों-बाबू के संरक्षण में न सिर्फ सरकार की आंख में धूल झोंक रहे हैं बल्कि एक आवास का निर्माण कर दूसरी आवास का पैसा फ्री में निकाल रहे हैं। इतना ही नहीं जो आवास बनाया ही नहीं गया, उसे भी दस्तावेजों में पूर्ण दिखाकर सारी राशि आहरण कर ली जा रही है। आवास योजना के साथ मनरेगा में भी लूट मची है। लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं किंतु कार्रवाई के नाम पर लीपापोती ही हो रही है। प्रधानमंत्री आवास और मनरेगा शाखा से जुड़े वर्षों से जमे लोगों की बदौलत सरकार का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है और बिना निर्माण कराये ही आवास के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। सख्त कार्रवाई, आर्थिक अनियमितता पर FIR और वसूली के अभाव में निःसन्देह इनके मनोबल बढ़े हैं।
इसी कड़ी में एक और मामला सामने आया है जिसमें ज़िले के विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत कराईनारा के आश्रित ग्राम भेलवागुडी निवासी मनीराम यादव पिता महेश राम के नाम पर सत्र 2024-2025 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ। आवास के प्रथम किश्त की राशि दिनांक 17/09/2024 को 40000/- रूपये एवं द्वितीय किश्त की राशि दिनांक 21/05/2025 को 55000/- रूपये एवं तृतीय किश्त की राशि दिनांक 14/06/2025 को 25000/- रूपये हितग्राही के खाते में जमा हुआ। 85 दिन की मजदूरी राशि 22164/- रूपये भुगतान भी हो गया और जियो टैग में दिनांक 26/05 /2025 को प्रधानमंत्री आवास निर्माण पूर्ण दिखा रहा है।
👉🏻दूसरी तरफ, इस मामले की वास्तविकता यह है कि मनीराम यादव पिता महेश राम द्वारा किसी भी प्रकार का कोई भी आवास निर्माण नहीं किया गया है बल्कि सारा भुगतान सिर्फ फर्जी जियो टैग करके निकाल लिया गया है।
👉🏻इस तरह का फर्जीवाड़ा तब हो रहा है जब आवास मित्र, रोजगार सहायक एवं सचिव के अलावा जनपद स्तर के एक अधिकारी की आवास निर्माण मॉनिटरिंग के लिए डयूटी प्रधानमंत्री आवास योजना में लग रही है। इसके बाद भी सिर्फ फर्जी जियो टैग के सहारे सामाग्री का भुगतान एवं मजदूरी भुगतान करा लिया गया है।
👉🏻इससे स्पष्ट होता है कि इस फर्जीवाड़े में आवास मित्र, रोजगार सहायक एवं सचिव के अलावा जनपद स्तर के अधिकारी की मिलीभगत है, जिनसे होकर भुगतान जारी होता है। यही एक बड़ी वजह है कि आवास में फर्जीवाड़ा के मामले संज्ञान में लाए जाने के बाद भी कोई जांच एवं कार्यवाही नहीं हो रही है क्योंकि सब के सब एक-दूसरे को बचाने में लग जाते है। इसलिए ग्राम पंचायत बेहरचुंवा में प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाला उजागर होने के बाद आज लगभग 20 दिन में ना तो कोई जांच हुई और ना ही कोई कार्यवाही की गई।
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