मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब कांड ने गंभीर रूप ले लिया है. इस मामले में मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है, जबकि 75 से अधिक पीड़ितों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है.
बंडा तहसील के कई गांवों में नकली और जहरीली शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने और मौतों के मामले सामने आए हैं. घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आबकारी विभाग के अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है.
जानकारी के मुताबिक, बंडा तहसील के ग्राम गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन में नकली शराब के सेवन के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े. कई पीड़ितों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. अब तक 12 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 75 से अधिक लोगों का इलाज चल रहा है. स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.
आबकारी विभाग के तीन अधिकारी निलंबित
जहरीली शराब कांड को गंभीरता से लेते हुए आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. सागर की सहायक आयुक्त आबकारी कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और आबकारी उप निरीक्षक, वृत्त बंडा रोशनी उरेती के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है.
इसके अलावा उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को मुख्यालय ग्वालियर अटैच कर दिया गया है. शासन की इस कार्रवाई से साफ है कि मामले में विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
अब तक 12 लोगों की हो चुकी मौत
प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि प्रभावित गांवों तक नकली या जहरीली शराब कैसे पहुंची और इसकी सप्लाई के पीछे कौन लोग शामिल हैं. जांच के दौरान शराब के निर्माण, सप्लाई और बिक्री से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा सकती है. वहीं, पीड़ितों के इलाज को लेकर अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं.
12 लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने से इलाके में दहशत और शोक का माहौल है. शासन की ओर से मामले में सख्त कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं. जांच के बाद इस पूरे शराब नेटवर्क और लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे और कार्रवाई हो सकती है.



