पति की मौत के बाद इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही एक विधवा… गोद में मासूम बेटी… और आरोप इतने गंभीर कि सुनकर कोई भी हैरान रह जाए। जांजगीर-चांपा की रहने वाली जसवीर कौर ने वार्ड क्रमांक 24 के पार्षद और नगर पालिका परिषद संघ के उपाध्यक्ष अमरजीत खटकड़, अपनी सास जसमीत कौर, देवर परमवीर सिंह और बुआ सास जितू कौर पर बड़ा आरोप लगाया है। आरोप है कि पति स्वर्गीय हरदीप सिंह के मृत्यु प्रमाण पत्र से पत्नी का नाम ही गायब करा दिया गया और कथित तौर पर फर्जी एफिडेविट के सहारे पूरा खेल रचा गया। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में हुआ यह कथित फर्जीवाड़ा?
जसवीर कौर का कहना है कि उनके पति स्वर्गीय हरदीप सिंह की मौत के बाद जारी शोक पत्र में भी उनका और उनकी बेटी सिमरजीत कौर का नाम नहीं था। इसे लेकर उन्होंने पहले ही पार्षद अमरजीत खटकड़ को जानकारी दी थी और स्पष्ट कहा था कि मृत्यु प्रमाण पत्र में पत्नी का नाम दर्ज होना चाहिए। लेकिन जब प्रमाण पत्र बनकर आया तो उसमें पत्नी के बजाय मृतक की मां का नाम दर्ज था। अब विधवा महिला सवाल उठा रही है कि आखिर एक शादीशुदा व्यक्ति की पत्नी और बेटी के होते हुए उनका नाम कैसे गायब हो गया?
महिला का आरोप है कि इस पूरे मामले में पार्षद और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मिलीभगत रही। जबकि सभी को पता था कि हरदीप सिंह शादीशुदा थे और उनकी बेटी सिमरजीत कौर है। इसके बावजूद कथित तौर पर फर्जी एफिडेविट के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करा दिया गया। पीड़िता का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जसवीर कौर के मुताबिक 17 जून 2026 को वह अपनी बेटी का नाम जमीन के दस्तावेजों में जुड़वाने के लिए आवेदन पर सील-साइन कराने पार्षद अमरजीत खटकड़ के पास पहुंचीं। आरोप है कि पार्षद ने उन्हें बिना बताए उनकी सास जसमीत कौर, देवर परमवीर सिंह और बुआ सास जितू कौर को बुला लिया। इसके बाद उनके साथ और उनकी सहेली के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया गया। महिला का आरोप है कि यह सब उन्हें डराने और उनका हक छीनने की कोशिश का हिस्सा है।
पीड़िता ने बताया कि दो महीने पहले उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई थी। हाल ही में प्रशासन की ओर से उनकी सास जसमीत कौर को नोटिस जारी कर कथित रूप से फर्जी तरीके से बने मृत्यु प्रमाण पत्र को तीन दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश भी दिया गया। लेकिन नोटिस के बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं होने से पीड़िता का सवाल है कि आखिर जिम्मेदारों पर हाथ डालने से प्रशासन क्यों बच रहा है?
पति की मौत के बाद अपने अधिकारों के लिए लड़ रही जसवीर कौर और उनकी मासूम बेटी सिमरजीत कौर आज भी न्याय की आस लगाए बैठी हैं। अब बड़ा सवाल यही है… क्या मौत के प्रमाण पत्र में हुए कथित खेल का सच सामने आएगा? क्या फर्जी दस्तावेजों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? और अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या फिर एक विधवा की आवाज फाइलों में दबकर रह जाएगी?



