कोरबा | बांकीमोंगरा | वार्ड क्रमांक 14 कटाईनार
एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशभर में “सुशासन तिहार” और जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बांकीमोंगरा के वार्ड क्रमांक 14 कटाईनार में पेयजल संकट से जूझ रहे लोग आज भी राहत का इंतजार कर रहे हैं।
वार्ड की निवासी एवं समाजसेविका डिंकी कौर द्वारा कलेक्टर जनदर्शन में दो बार शिकायत दर्ज कराए जाने के बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। भीषण गर्मी के बीच वार्डवासी पानी के लिए परेशान हैं और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पार्षद पति हेम सिंह से दूरभाष के माध्यम से संपर्क किया गया। बातचीत के दौरान उन्होंने स्वीकार किया कि पूर्व में वार्ड में एक बोर-बोरिंग कार्य कराया गया था, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। उनके अनुसार बोर-बोरिंग की खुदाई लगभग 30 से 40 फीट तक ही हुई थी तथा तकनीकी कारणों और कुछ खराबी की वजह से वह चालू नहीं हो पाया।
हेम सिंह ने यह भी बताया कि बोर-बोरिंग के लिए पानी की उपलब्धता की जानकारी पारंपरिक तरीके से एक व्यक्ति द्वारा नारियल के माध्यम से जांच कर बताई गई थी। उनका कहना है कि यदि वैज्ञानिक एवं तकनीकी सर्वे के आधार पर स्थान का चयन किया गया होता तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपये के विकास कार्य और पेयजल योजनाएं संचालित की जाती हैं, तो क्या तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जाना चाहिए? क्या बोर-बोरिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य केवल अनुमान और परंपरागत तरीकों के भरोसे कराए जा सकते हैं?
हालांकि पार्षद पति हेम सिंह ने आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर वार्ड की पेयजल समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा तथा तत्काल राहत के रूप में टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
फिलहाल वार्डवासियों की निगाहें प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के वादों पर टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जनदर्शन में दर्ज शिकायतों के बाद प्रशासन केवल आश्वासन देता है या वास्तव में जांच और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाता है।
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